International Nurse Day 2025 : केवल डॉक्टर ही नहीं मेडिकल की रीढ़ होती हैं नर्सेज, जानिए किस शख्सियत की याद में मनाते हैं नर्स डे

आज यानि 12 मई को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में जिस तरह से डॉक्टर्स ने मरीज के लिए जी जान लगाई उस तरह ही नर्सों का हौंसला काम का था जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2025
अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2025 (सौ. सोशल मीडिया)
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International Nurse Day 2025 : चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टर का जिस तरह से स्थान होता है उस तरह से ही नर्स का कार्य भी उपयोगिता रखता है। आज यानि 12 मई को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में जिस तरह से डॉक्टर्स ने मरीज के लिए जी जान लगाई उस तरह ही नर्सों का हौंसला देश के लिए कमाल कर गया है। नर्स की भूमिका और उपयोगिता को बताने के लिए एक महान शख्यियत ने इस दिन को मनाने की शुरूआत। चलिए जानते है नर्स डे से जुड़ी खास बातें।

मशहूर नर्स ने दिवस मनाने की पहल की

दुनिायाभर की नर्स को समर्पित इस दिन की शुरूआत करने वाली नर्स का नाम फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) है। इनकी याद में हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है। कहा जाता है कि, इस दिवस को मनाने की शुरूआत 12 मई 1820 को की गई थी। मशहूर नर्स नाइटिंगल, अपनी जिम्मेदारी नर्स की निभाने के साथ ही एक समाज सुधारक भी थीं। कहा जाता है कि, क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने जिस तरह से काम किया था, उसकी सराहना आज तक होती थी।  इसलिए उन्हें 'द लेडी विद द लैंप' के नाम से भी जानी जाती हैं। क्योंकि वो रात के अंधेरे में लैंप लेकर घायल सैनिकों का इलाज करने के लिए निकलती थीं।

युद्ध के दौरान घायल सैनिकों में इन्फेक्शन बढ़ रहा था, जिससे सैनिकों की मौत हो रही थी।इलाज से हजारों की तादाद में सैनिक फिर से ठीक होने लगे थे. अपने इस सराहनीय काम से फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने 'नर्सिंग' को महिलाओं के लिए एक नया पेशा बना दिया था।

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मरीज के देखभाल की जिम्मेदारी निभाती है नर्स

कहा जाता है कि, अंतरराष्ट्रीय नर्स डे दिवस की बात की जाए तो इसका महत्व बेहद खास है। कहते हैं कि, जहां पर अस्पतालों में मरीज का इलाज भले ही डॉक्टर करते हैं, लेकिन उनकी देखभाल की जिम्मेदारी नर्सेस पर होती है।  कोरोना महामारी जैसे काल में भगवान के रूप में डॉक्टर और नर्स ही थे जिन्होंने सराहनीय काम किया था। कहते हैं कि, अपनी जान की परवाह किए बिना, अपनों से दूर होकर नर्सों ने महामारी से पीड़ित मरीजों की सेवा की थी।मेडिकल फील्ड में नर्सेस के इस अहमियत पर जोर देने और उनका आभार जताने के लिए इस खास दिन को मनाया जाता है।

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