बच्चों में फैल रहा है जापानी इंसेफेलाइटिस बुखार, लक्षण पहचान कर तुरंत करें बचाव
सर्दियों में भी मच्छरों के बढ़ने की समस्या हो जाती है इसमें एक बीमारी जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले राजधानी दिल्ली में देखने के लिए मिल रहे है जो बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे है।
- Written By: दीपिका पाल
जापानी इंसेफेलाइटिस बुखार (सौ.सोशल मीडिया)
Japanese encephalitis virus: बदलते मौसम के साथ बीमारियां भी लगातार बढ़ने लगती है सर्दी-जुकाम तो जहां पर आम बात है लेकिन कई वायरस के मामले बढ़ने लगते है। सर्दियों में भी मच्छरों के बढ़ने की समस्या हो जाती है इसमें एक बीमारी जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले राजधानी दिल्ली में देखने के लिए मिल रहे है जो बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे है।
भारत के अलावा यह बीमारी दुनियाभर में फैलती जा रही है इससे समय पर इलाज नहीं मिलने पर बीमारी खतरनाक हो जाती है इससे मृत्युदर 30 फीसदी हो जाती है। चलिए विस्तृत रुप से जानते है इस बीमारी के बारे में।
जानिए क्या होती है यह बीमारी
यहां पर स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स की मानें तो, जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस (जेईवी) एक फ्लेविवायरस है, और मच्छरों (विशेष रूप से क्यूलेक्स ट्राइटेनियोरिंचस) द्वारा फैलता है। यहां पर इस बीमारी के लाखों मामले देखने के लिए मिलते है। इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों को होता है। यह वायरस इंसेफेलाइटिस पानी में रहने वाले पक्षियों, जानवरों ( सुअरो) से फैलता है।
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इन सभी जानवरों में जेईवी वायरस होता है जिसमें इंसानों को मच्छर काट लेता है तो उस व्यक्ति में यह वायरस फैल जाता है। इस वायरस के होने पर व्यक्ति संक्रमित हो जाता है इसके बाद सिरदर्द के साथ उल्टी आना और दौरे पड़ने जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।
इस बीमारी में तुरंत इलाज की जरुरत
जो व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते है तो पीड़ित को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। इस बीमारी में लक्षणों के आधार पर ही इलाज किया जाता है। बुखार को दिमाग पर फैलने नहीं दिया जाता है अगर एक बार दिमाग पर अटैक कर देता है तो मरीज की जान बचाना काफी मुश्किल हो सकता है। इस बीमारी में इलाज मिलना जरूरी होता है। इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन मौजूद है जिसे जापानी इंसेफ़ेलाइटिस वायरस वैक्सीन कहते हैं।
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ये वैक्सीन लगने के बाद इंसेफेलाइटिस से संक्रमित होने का खतरा 80 से 90 फीसदी तक कम हो जाता है। इसके अलावा वायरस से निजात पाने के लिए नियमित तौर पर दो डोज वैक्सीन के लगाना जरूरी होता है। पहली खुराक 9 महीने में और दूसरी 16 से 24 महीने में लगवानी होती है. जन्म के बाद हर बच्चे को ये वैक्सीन लगवानी चाहिए।
जानिए कैसे करें इस बीमारी से बचाव
जैसा कि, हमने जाना यह बीमारी खासकर मच्छर काटने से फैलती है इसके लिए बचाव भी करना जरूरी होता है।
1-अगर आपके आसपास मच्छर है तो आप पूरी बाजू के कपड़े हमेशा पहने छोटे कपड़ों में आपको मच्छर काटेंगे।
2- अपने आसपास स्वच्छता रखने से यह वायरस पनपता है।
3- अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण हैं तो डॉक्टर से सलाह लें।
4-इस खतरनाक वायरस में जेईवी के खिलाफ वैक्सीनेशन उपलब्ध है इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए।
