इबोला वायरस का मंडराया वैश्विक खतरा, भारत सरकार ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी; इन 3 देशों में जाने से बचें
WHO on Ebola: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इबोला को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित किए जाने के बाद, भारत सरकार ने नागरिकों के लिए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा न करने की सलाह जारी की है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Ebola Virus India Travel Advisory: पूरी दुनिया अभी कोरोना की मार से उबर ही रही थी कि एक और जानलेवा वायरस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इसे ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया है।
इसी क्रम में भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सक्रियता दिखाते हुए एक उच्च-स्तरीय एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अफ्रीकी महाद्वीप के प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने से फिलहाल परहेज करें, क्योंकि यह संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है और जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की सख्त चेतावनी
भारत सरकार ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए अपने नागरिकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की किसी भी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि अगली सूचना तक इन देशों में जाने से बचना ही सुरक्षा के लिहाज से बेहतर है। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक वर्तमान में इन देशों में रह रहे हैं या वहां की यात्रा पर हैं, उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी किए गए निर्देशों और एहतियातों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
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बुंडिबुग्यो स्ट्रेन: बिना टीके और इलाज वाला खतरनाक वायरस
इस बार इबोला का जो रूप (स्ट्रेन) सामने आया है, वह ‘बुंडिबुग्यो’ वायरस स्ट्रेन है। वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि वर्तमान में इस विशिष्ट स्ट्रेन की रोकथाम के लिए कोई भी स्वीकृत टीका या उपचार मौजूद नहीं है। यह एक प्रकार का वायरल हेमोरेजिक बुखार है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है, जिससे यह स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने भी इसे ‘महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है।
A press release by Ministry of Health and Family Welfare reads: “In light of the reported outbreaks of Ebola Disease in the Democratic Republic of the Congo (DRC) and Uganda, the World Health Organization (WHO), under the International Health Regulations (IHR), 2005, on 17 May… pic.twitter.com/ss7JL9JxNJ — Press Trust of India (@PTI_News) May 24, 2026
भारत में फिलहाल कोई मामला नहीं, पर निगरानी हुई सख्त
राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक बुंडिबुग्यो वायरस स्ट्रेन का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, सरकार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों के आधार पर, 22 मई से ही देश के प्रवेश बिंदुओं (एयरपोर्ट और बंदरगाह) पर रोग निगरानी को मजबूत कर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले ऐसे यात्रियों की पहचान और सघन जांच की जाए जिन्हें अस्पष्ट बुखार है, ताकि संक्रमण को देश की सीमाओं के भीतर आने से रोका जा सके।
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कांगो और युगांडा की सीमाएं सबसे ज्यादा खतरे में
बयान के मुताबिक, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा के पड़ोसी देश, विशेष रूप से दक्षिण सूडान, इस बीमारी के फैलने के सबसे हाई रिस्क पर हैं। इसी भौगोलिक निकटता और संक्रमण की संक्रामक प्रकृति को देखते हुए भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में इन तीन देशों को प्रमुखता से शामिल किया है। आम जनता से अपील की गई है कि वे इबोला के लक्षणों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य जांच करवाएं।
