कितने स्वस्थ हैं हमारे डॉक्टर्स, इस गंभीर मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं जीवनरक्षक
साल 2025 में 1 जुलाई को मनाए जाने वाले डॉक्टर्स डे की थीम समस्त डॉक्टर्स की सेहत को ध्यान में रखते हुए की गई है। इस साल की थीम भी इसी पर आधारित है, 'बिहाइंड द मास्क-केयरिंग फॉर केयरगिवर्स'।
- Written By: दीपिका पाल
डॉक्टर्स हो रहे बर्नआउट के शिकार (सौ. सोशल मीडिया)
आज दुनियाभर में राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस यानि Doctor’s Day मनाया जा रहा है। यह हर 1 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन दुनियाभर के सभी डॉक्टर्स के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जाता है। भगवान के बाद अगर कोई हमारे जीवन के रक्षक है वह डॉक्टर्स। अगर हमारे जीवन में किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या आ जाएं डॉक्टर तुरंत आराम देने से चुकते नहीं है।
बड़ी से बड़ी बीमारी का तोड़ हमारे जीवन के रक्षक के पास होता है लेकिन खुद की सेहत का ख्याल शायद ही डॉक्टर्स रख नहीं पाते है। जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर्स बर्नआउट जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है जिसमें इंसान बुरी तरह से तनाव में होता है लेकिन काम करता है।
इस साल की थीम डॉक्टर्स पर बेस्ड
आपको बताते चलें कि, साल 2025 में 1 जुलाई को मनाए जाने वाले डॉक्टर्स डे की थीम समस्त डॉक्टर्स की सेहत को ध्यान में रखते हुए की गई है। इस साल की थीम भी इसी पर आधारित है, ‘बिहाइंड द मास्क-केयरिंग फॉर केयरगिवर्स’। यानि आपकी सेहत रखने वाले की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। यहां पर आंकड़ों से समझ सकते है कि, हमारे डॉक्टर्स जो हमारी सेहत को लेकर सजग होते है वह खुद किसी ना किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे है। क्योंकि डॉक्टर्स के हाथ में ही होता है वे मरीज की जान को बचा सकते है या नहीं।
सम्बंधित ख़बरें
अमरावती में भीषण गर्मी का अलर्ट: दोपहर 12 से 3 बजे तक घर से न निकलें, आयुक्त वर्षा लड्डा की खास अपील
Husband Appreciation Day: सिर्फ एक थैंक्यू से मजबूत होगी रिश्ते की डोर! जानें क्यों और कैसे मनाएं यह खास दिन
मां लक्ष्मी को बेहद प्रिय है यह प्रसाद! इस अक्षय तृतीया घर पर तैयार करें अमृत जैसा पंचामृत, नोट करें रेसिपी
बूंदी का रायता खाकर हो चुके हैं बोर? इस समर सीजन ट्राई करें ये 7 यूनिक रेसिपीज; खाने का स्वाद होगा दोगुना
यहां राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के आरटीआई डेटा के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच, भारत में 119 मेडिकल छात्रों ने आत्महत्या की, उनमें से 58 स्नातकोत्तर छात्र थे। आंकड़ें भले डराते है लेकिन यह अहसास दिलाते है कि, हमारे डॉक्टर्स भी स्वस्थ नहीं है। वह मानसिक ट्रॉमा से गुजर रहे होते है। युवा डॉक्टरों को बिना आराम के 36-36 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ती है, इन सब प्रयासों के बावजूद कई बार वह हिंसा का भी शिकार होते हैं।
साइलेंट समस्या हैं बर्नआउट
आपको बताते चलें कि, बर्नआउट एक तरह से गंभीर बीमारी में से एक है जहां पर विशेष रूप से कार्डियोलॉजी जैसी उच्च दबाव वाले सेक्शन में, जहां हर सेकंड मायने रखता है। इसे लेकर इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ. निरंजन हिरेमथ कहते हैं पिछले कुछ वर्षों में, हमने स्वास्थ्य सेवाओं में नाटकीय रूप से बदलाव देखा है। यहां पर जिस तरह से डॉक्टर्स हमें बीमारी से लड़ने के लिए हिम्मत देते रहते है वैसे ही डॉक्टर्स को प्यार और सहानुभूति की आवश्यकता होती है। इस समस्या के बारे में आपको जानना चाहिए।
