पानीपत में RSS की कार्यशाला में पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय बैठक का शुभारंभ, लिए जाएंगे अहम फैसले
RSS Meeting in Panipat: RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा समालखा, हरियाणा में 13-15 मार्च 2026 तक आयोजित है। संगठनात्मक बदलाव, प्रांत और क्षेत्र संरचना, संभाग प्रचारक नियुक्ति पर चर्चा होगी।
- Written By: अक्षय साहू
पानीपत में आरएसएस की मीटिंग शुरू (सोर्स- सोशल मीडिया)
RSS Meeting in Haryana: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आज हरियाणा के समालखा में शुरू हो गई है। यह बैठक 13 मार्च से 15 मार्च 2026 तक चलेगी। उद्घाटन समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक की शुरुआत की। इस बैठक में देशभर से 1487 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
बैठक में राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा के साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने की संभावना जताई जा रही है। संघ शिक्षा वर्ग, कार्यकर्ता विकास वर्ग, और साहित्य प्रशिक्षण वर्गों की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा, आगामी वर्ष की संघ कार्य योजना पर चर्चा की जाएगी।
सालभर के कार्यों पर होगी चर्चा
संघ की दृष्टि से यह बैठक महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें सालभर के कार्यों पर चर्चा की जाती है और भविष्य की योजनाओं का निर्धारण किया जाता है। संघ का प्रचार-प्रसार महानगर, प्रांत और क्षेत्र स्तर पर इस बैठक में तय की जाने वाली योजनाओं के तहत बढ़ाया जाएगा।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आज माधव सृष्टि, समालखा, हरियाणा में प्रारम्भ हुई। बैठक का शुभारम्भ पू. सरसंघचालक मोहन भागवत जी और मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया। बैठक में देशभर से 1487 प्रतिनिधि भाग ले… pic.twitter.com/8MbUo5THe3 — RSS (@RSSorg) March 13, 2026
लिए जा सकते हैं कई अहम फैसले
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के मौके में संगठनात्मक बदलाव की योजना बना रहा है। यह बदलाव इस बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है, और इसे 2027 में नागपुर में होने वाली अगली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लागू किया जा सकता है। संघ प्रांत व्यवस्थाओं को समाप्त करके राज्य प्रचारक की तर्ज पर नया ढांचा लागू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में संघ के 45 प्रांत और 11 क्षेत्र हैं, जिनमें से 9 क्षेत्र करने की योजना पर विचार हो सकता है।
संभाग प्रचारक की नियुक्ति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक नई व्यवस्था में प्रांत प्रचारक के स्थान पर संभाग प्रचारक नियुक्त करने की संभावना पर विचार कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र में चार प्रांत हैं- विदर्भ, कोंकण, देवगिरी और पश्चिम महाराष्ट्र, जिनमें से विदर्भ में दो संभाग नागपुर और अमरावती हैं। इस प्रकार, संघ में संभागों की संख्या में इजाफा किया जा सकता है।
क्षेत्र प्रचारक का पुनर्गठन
संघ 11 क्षेत्र प्रचारक को घटाकर 9 क्षेत्र प्रचारक करने की योजना पर भी विचार कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारकों को एक साथ जोड़ने की संभावना पर चर्चा हो रही है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान के क्षेत्र प्रचारक को उत्तर क्षेत्र प्रचारक के तहत लाने की योजना भी विचाराधीन है।
जमीनी स्तर को मजबूत करने की दिशा
संघ एक राज्य में एक राज्य प्रचारक नियुक्त करने का विचार कर रहा है, जो अपने राज्य में संघ के कार्यों का नियोजन करेगा। इस बदलाव के तहत संघ जमीनी स्तर को मजबूत करने के लिए संगठन के ढांचे को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच दूरी घटेगी, फैसले अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे, और सामाजिक कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
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हालांकि, संघ के महानगर, विभाग और जिला प्रचारक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, और यह व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी। अगर इस बैठक में सहमति बन जाती है, तो 2027 की बैठक में यह बदलाव लागू कर दिया जा सकता है। शताब्दी वर्ष के कारण इस वर्ष कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन 2027 के बाद यह नई संरचना लागू हो सकती है।
