नायब सिंह सैनी के साथ संजय भाटिया, फोटो- सोशल मीडिया
Haryana Rajya Sabha Election 2026: हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर हुआ चुनाव किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा। सोमवार को हुई वोटिंग के बाद मंगलवार तड़के करीब 1:10 बजे जब नतीजे घोषित हुए, तो सत्ता और विपक्ष दोनों के खेमों में खलबली मच गई। बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध विजेता घोषित किए गए, लेकिन इस जीत के पीछे छिपे आंकड़ों और ‘धोखे’ की कहानी काफी लंबी है।
इस चुनाव का सबसे बड़ा मोड़ इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) का मतदान से दूर रहने का फैसला रहा। इनेलो के दो विधायकों, अभय सिंह चौटाला और आदित्य देवी लाल ने ‘जनता की भावनाओं’ का हवाला देते हुए वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों में से 88 विधायकों ने मतदान किया, क्योंकि इनेलो विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाए रखी। काउंटिंग के दौरान 5 वोट अवैध पाए गए, जिनमें 4 कांग्रेस के और 1 बीजेपी का था।
संजय भाटिया: इन्हें 39 प्रथम वरीयता के वोट मिले और 3900 के वैल्यू स्कोर के साथ वे आसानी से जीत गए (जीत के लिए 2767 का कोटा चाहिए था)।
कर्मवीर सिंह बौद्ध: इन्हें 28 प्रथम वरीयता के वोट मिले, जिससे इनका वैल्यू स्कोर 2800 रहा।
सतीश नांदल (निर्दलीय): इन्हें 16 प्रथम वरीयता के वोट मिले। संजय भाटिया के सरप्लस वोटों (1133) के ट्रांसफर के बाद इनका स्कोर 2733 तक पहुंचा। अंततः कर्मवीर बौद्ध ने सतीश नांदल को महज एक वोट (वैल्यू के आधार पर मामूली अंतर) से हरा दिया।
अगर हरियाणा चुनाव को लेकर चलें तो, राज्यसभा चुनाव के तय नियमों के मुताबिक एक सीट जीतने के लिए आवश्यक कोटा 2767 तय किया गया था। कोटा तय करने का तरीका यह होता है कि जब एक से अधिक सीटों के लिए चुनाव होता है, तो पहली गिनती में हर वैध मतपत्र की वोट वैल्यू 100 मानी जाती है, जिसे मूल वोट कहा जाता है।
कल यानी 16 मार्च को हुए चुनाव में 83 वैध वोट थे। इसी आधार पर कोटा का फॉर्मूला बना:
83×100 ÷ 3 + 1 = 2767
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को 39 प्रथम वरीयता वोट मिले। इस तरह उनके पक्ष में कुल वोट वैल्यू 39×100 = 3900 हो गई। चूंकि यह संख्या जीत के लिए जरूरी 2767 के कोटा से ज्यादा थी, इसलिए उन्हें निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया कि कांग्रेस के 5 विधायकों ने ‘क्रॉस-वोटिंग’ की। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के 5 क्रॉस-वोट और 4 अमान्य वोटों को मिलाकर कुल 9 वोट निर्दलीय उम्मीदवार को चले गए, जिसका मतलब है कि कांग्रेस के करीब 25% विधायकों ने पाला बदल लिया है। इसी डर से कांग्रेस ने अपने विधायकों को वोटिंग से पहले हिमाचल प्रदेश (शिमला) स्थानांतरित कर दिया था, जिसे सीएम सैनी ने ‘विधायकों को बंधक बनाना’ करार दिया।
इस चुनाव में इनेलो के दो विधायकों के वोटिंग में हिस्सा न लेने के फैसले ने कांग्रेस की लाज बचा ली। मुख्यमंत्री सैनी ने इनेलो पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें कांग्रेस की ‘बी-टीम’ कहा। उनका तर्क था कि अगर इनेलो ने निर्दलीय उम्मीदवार को वोट दिया होता, तो नतीजा कुछ और होता। हालांकि, इनेलो नेताओं ने कहा कि उन्होंने ‘जनता की भावनाओं’ को देखते हुए वोट नहीं दिया।
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस जीत को कांग्रेस के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ बताया। उन्होंने बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ की कोशिश करने और रिटर्निंग ऑफिसर पर पक्षपातपूर्ण होने का आरोप लगाया। हुड्डा ने कहा कि जनता विश्वासघात करने वाले विधायकों को सबक सिखाएगी। उधर, कांग्रेस प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद ने साफ किया कि ‘धोखा’ देने वाले विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।