गुजरात में आज 2027 का सेमीफाइनल! पहली बार AAP ने उतारे 5 हजार से अधिक उम्मीदवार, BJP-कांग्रेस से मुकाबला

Gujarat News: गुजरात के 393 निकायों के चुनाव को 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। भाजपा ने 692 निर्विरोध सीटों पर जीत दर्ज कर दबदबा बनाया है। त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस और AAP की साख दांव पर है।
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डिजाइन फोटो (नवभारत)
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Gujarat Local Body Elections Result 2026: गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इन चुनावों को 2027 के सियासी मुकाबले का “सेमीफाइनल” माना जा रहा है, क्योंकि इनके नतीजे आने वाले विधानसभा चुनाव के राजनीतिक रुझान का संकेत दे सकते हैं।

राज्य में कुल 393 स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हुए हैं, जिनमें 15 नगर निगम, 84 नगर पालिकाएं, 34 जिला पंचायतें और 260 तहसील पंचायतें शामिल हैं। इन सभी निकायों की कुल 10,005 सीटों में से 707 सीटें पहले ही निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं, जबकि बाकी 9,297 सीटों के लिए 25,579 उम्मीदवार मैदान में हैं।

BJP-कांग्रेस-AAP में त्रिकोणीय मुकाबला

इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। खासकर अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों पर सभी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इनमें से कई नगर निगमों में इस बार पहली बार मेयर चुने जाएंगे। निर्विरोध सीटों के मामले में भाजपा ने मजबूत बढ़त बनाई है। कुल 707 निर्विरोध सीटों में से 692 सीटें भाजपा के खाते में गई हैं, जबकि कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों को सीमित सफलता मिली है। आम आदमी पार्टी को इस मोर्चे पर खास सफलता नहीं मिली है।

पहली बार AAP के 5,261 उम्मीदवार

भाजपा ने सबसे अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जिनकी संख्या करीब 9,296 है। कांग्रेस के लगभग 8,443 और आम आदमी पार्टी के 5,261 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 2,527 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

इन चुनावों में ओबीसी आरक्षण को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने का असर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव सिर्फ स्थानीय सत्ता का नहीं बल्कि 2027 के बड़े चुनावी मुकाबले का संकेत देने वाला माना जा रहा है।

2027 का सेमीफाइनल

भाजपा लंबे समय से शहरी निकायों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है, लेकिन इस बार कम मतदान और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने सभी दलों के लिए चुनौती पैदा कर दी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही ग्रामीण और शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का राजनीतिक माहौल किस दिशा में जाएगा।

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