

Kutch Earthquake: गुजरात के कच्छ जिले में गुरुवार दोपहर तीन मिनट के भीतर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। भूकंप का पहला झटका दोपहर 2:20 बजे महसूस किया गया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र खावड़ा से 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था।
पहले झटके के महज तीन मिनट बाद, दोपहर 2:23 बजे दूसरा भूकंप आया। इसकी तीव्रता 3.2 मापी गई। दूसरे भूकंप का केंद्र धोलावीरा से 32 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर में बताया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों भूकंपों के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान या घायल होने की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
कच्छ भारत के सबसे अधिक भूकंप संभावित (Seismic Zone) क्षेत्रों में गिना जाता है। इस इलाके में समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। वर्ष 2001 में कच्छ के भुज में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, जिसके बाद से इस क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाती है।
इससे पहले 22 अप्रैल 2026 को गुजरात के आणंद और आसपास के इलाकों में 3.4 तीव्रता का भूकंप आया था। शाम करीब 4:35 बजे आए उस भूकंप का केंद्र आणंद से लगभग 36 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। उस दौरान भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली थी।
वहीं, 21 अप्रैल को सौराष्ट्र क्षेत्र के राजकोट जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इससे पहले 29 मार्च को अमरेली जिले में 3.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र अमरेली से करीब 42 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में 11.6 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
इसके अलावा 28 और 29 मार्च के बीच अमरेली जिले के सावरकुंडला और मितियाला क्षेत्र में लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गई थीं। इस दौरान स्थानीय लोगों ने 14 हल्के से मध्यम तीव्रता के झटके महसूस किए थे, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात देश के सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील राज्यों में शामिल है। राज्य कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों के पास स्थित है, जिसके कारण यहां समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। खासकर कच्छ, सौराष्ट्र और मध्य गुजरात के इलाके भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं।