‘मैं तुम्हारा गला काट दूंगी’: यामी गौतम ने याद किया थिएटर का पहला अनुभव
Yami Gautam ने अपने शुरुआती थिएटर दिनों का एक मजेदार किस्सा सुनाया। 'चुप रहो, वरना मैं तुम्हारा गला काट दूंगी' डायलॉग को अजीब तरह से बोलने पर सब हंसने लगे थे।
- Written By: अनिल सिंह
Yami Gautam (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Yami Gautam First Theatre Experience: बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम इन दिनों हाल ही में रिलीज हुई अपनी फिल्म ‘हक’ की सफलता का जश्न मना रही हैं। इस बीच, यामी ने आई.ए.एन.एस. से बातचीत करते हुए अपने करियर के शुरुआती दिनों के एक मजेदार थिएटर अनुभव को याद किया, जब एक डायलॉग को अजीब तरीके से बोलने पर वहां मौजूद सभी लोग हँस-हँसकर लोटपोट हो गए थे।
यामी ने बताया कि यह घटना तब की है जब वह स्कूल में थिएटर सीख रही थीं और उनकी क्लास में एक नए टीचर आए थे।
जब डायलॉग सुनकर हँसने लगे थे लोग
यामी गौतम ने उस मजेदार घटना को याद करते हुए बताया, “जब मैं स्कूल में थिएटर सीख रही थी, तब वहां एक नया टीचर आया था। थिएटर बस शुरू हो रहा था और हर छात्र को अपनी लाइन अलग अंदाज में बोलनी थी।”
यामी का डायलॉग: “मुझे याद है कि मेरा एक डायलॉग था, ‘चुप रहो, छोटे शैतान, वरना मैं तुम्हारा गला काट दूंगी’। ये लाइन मैंने इतनी अजीब तरीके से कही कि सभी लोग हंस-हंसकर लोटपोट हो गए।”
टीचर की प्रतिक्रिया: यामी के डायलॉग बोलने के तरीके पर टीचर ने मज़ाकिया अंदाज़ में उनसे कहा, “तुम तो किसी गली के आदमी की तरह बोल रही हो।”
यामी का जवाब: यामी ने तुरंत जवाब दिया, “मैंने कहा, ‘मुझे नहीं पता मैं कैसे करूं, लेकिन एक बात अच्छी है कि कम से कम आपको मेरी लाइनें तो याद हैं।”
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निर्देशक और अभिनेता का तालमेल
यामी ने अभिनय और निर्देशक के बीच के संबंध पर भी गहराई से बात की। उन्होंने कहा कि निर्देशक कहानी की दिशा तय करता है और अभिनेता उनके विजन को स्क्रीन पर दिखाता है।
अभिनय का मतलब: यामी के अनुसार, “अभिनय केवल डायलॉग बोलने तक सीमित नहीं है। यह किरदार की भावनाओं, मानसिकता और कहानी की दिशा को समझने का तरीका है।”
सफलता का सूत्र: उन्होंने कहा कि एक ही किरदार को एक अभिनेता कई अलग-अलग तरीकों से निभा सकता है, लेकिन स्क्रीन पर जो दिखता है, वह हमेशा निर्देशक के विजन का हिस्सा होता है। उनका मानना है कि निर्देशक और अभिनेता का तालमेल ही किसी फिल्म को सफल बनाता है।
