विवेक अग्निहोत्री (सोर्स : सोशल मीडिया)
Vivek Agnihotri Nepotism Debate: बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस कोई नई नहीं है। जब भी किसी स्टार किड को बड़ी फिल्म या दमदार लॉन्च मिलता है, तो सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी गलियारों तक सवाल उठने लगते हैं। बाहरी कलाकार अक्सर आरोप लगाते हैं कि इंडस्ट्री में मौके बराबरी से नहीं मिलते, जबकि फिल्मी परिवारों से आने वालों के लिए रास्ते पहले से आसान होते हैं।
निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने खुलकर अपनी राय रखी है और नेपोटिज्म को एक दिलचस्प उदाहरण के जरिए समझाया है। विवेक अग्निहोत्री का मानना है कि नेपोटिज्म को हमेशा नकारात्मक नजरिए से देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी परिवार की अगली पीढ़ी उसी पेशे में आगे बढ़ना चाहती है, तो इसमें बुराई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैसे एक डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, शिक्षक का बच्चा शिक्षक या कारीगर का बेटा कारीगर बनता है, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता। इसी तरह फिल्मी परिवार से आने वाला व्यक्ति अगर अभिनय या फिल्ममेकिंग में रुचि रखता है, तो उसे मौका मिलना स्वाभाविक है। विवेक रंजन ने अपने विचारों को और स्पष्ट करते हुए ‘कुम्हार और मटका’ का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि अगर कोई कुम्हार है और उसका बेटा मटका बनाना अच्छे से जानता है, तो उसे मटका बनाने का अवसर मिलना बिल्कुल सही है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब योग्यता की अनदेखी की जाती है। उनके मुताबिक नेपोटिज्म तभी सही है, जब उसके साथ टैलेंट और मेहनत जुड़ी हो। निर्देशक ने साफ शब्दों में कहा कि नेपोटिज्म उस वक्त जहर बन जाता है, जब कुम्हार के बेटे को मटका बनाना नहीं आता, फिर भी उसे बार-बार मौका दिया जाता है। चाहे वह कितनी भी बार मटका बनाए और वह टूट जाए, फिर भी उसी पर पैसा और संसाधन लगाए जाते हैं।
वहीं दूसरी तरफ कतार में खड़े ऐसे लोग होते हैं, जो उससे बेहतर मटका बना सकते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिलता। ऐसे में नेपोटिज्म न सिर्फ गलत है, बल्कि इंडस्ट्री के लिए नुकसानदेह भी बन जाता है। विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि किसी को परिवार की वजह से पहला मौका मिल सकता है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए सिर्फ और सिर्फ काबिलियत ही काम आती है। अगर योग्यता नहीं होगी, तो दर्शक खुद ही नकार देंगे।