देव आनंद ने बचाई थी Suraiya की जान, नाव हादसे के बाद शुरू हुआ प्यार, परिवार की नाराजगी ने तोड़ दिया रिश्ता
Suraiya Birth Anniversary: सुरैया और देव आनंद जीत के सेट पर शादी तक करना चाहते थे, लेकिन परिवार के विरोध के कारण उनका रिश्ता टूट गया। सुरैया ने अपने अभिनय और गायन से भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी।
- Written By: सोनाली झा
सुरैया (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Suraiya Birth Anniversary Special Story: हिंदी सिनेमा की दिग्गज गायिका और अभिनेत्री सुरैया का नाम आज भी भारतीय फिल्म इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। 1940 और 1950 के दशक में अपनी सुरीली आवाज और शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली सुरैया की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर एक बार फिर उनकी और देवानंद की अधूरी मोहब्बत चर्चा में है।
फिल्म ‘अफसर’ की शूटिंग के दौरान देव आनंद और सुरैया एक-दूसरे के करीब आए थे। कहा जाता है कि एक गाने की शूटिंग के समय दोनों नाव में सवार थे, तभी नाव पलट गई। उस दौरान देव आनंद ने सुरैया को डूबने से बचाया था। इस घटना के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्यार परवान चढ़ने लगा। देव आनंद और सुरैया एक-दूसरे से बेहद मोहब्बत करते थे और शादी करना चाहते थे। लेकिन उनकी प्रेम कहानी को परिवार की मंजूरी नहीं मिल सकी।
फिल्म के सेट पर शादी करने की बनाई थी योजना
साल 1949 में रिलीज हुई जीत की शूटिंग के दौरान एक शादी का दृश्य फिल्माया जाना था। बताया जाता है कि देव आनंद और सुरैया ने इस मौके का फायदा उठाकर असली पंडित बुलाने और सचमुच शादी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, यह बात सुरैया की नानी तक पहुंच गई। उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया और सुरैया को सेट से घर ले गईं। दोनों अलग-अलग धर्मों से थे और इसी वजह से परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुआ। आखिरकार यह प्रेम कहानी अधूरी रह गई।
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लोकप्रियता के शिखर पर थीं सुरैया
1948 से 1951 के बीच सुरैया हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे ज्यादा पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके घर के बाहर प्रशंसकों की भीड़ लगी रहती थी और कई बार यातायात तक प्रभावित हो जाता था। उनकी फिल्म दिल्लगी एक्टर धर्मेंद्र को इतनी पसंद थी कि उन्होंने इसे 30 से अधिक बार देखा था।
अमर हैं सुरैया की यादें
सुरैया ने अभिनय और गायन दोनों क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। उनकी आवाज में गाई गई फिल्म मिर्जा गालिब की ग़ज़लों की सराहना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी की थी। सुरैया की कला और उनकी अधूरी प्रेम कहानी आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित किस्सों में गिनी जाती है।
