जिस आवाज के दीवाने थे राज कपूर, उसी मुकेश ने झेली ऐसी तंगी, बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए लेना पड़ा था उधार

Mukesh Career: मुकेश ने अपनी आवाज से हिंदी सिनेमा में खास मुकाम बनाया, लेकिन उनकी जिंदगी में आर्थिक तंगी का दौर भी आया था। नितिन मुकेश के मुताबिक, एक समय बच्चों की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं थे।
Mukesh Death Anniversary
मुकेश (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Mukesh Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के दिग्गज सिंगर मुकेश ने अपनी आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। राज कपूर से लेकर मनोज कुमार, सुनील दत्त और दिलीप कुमार जैसे बड़े कलाकारों के लिए उन्होंने कई यादगार गाने गाए। हालांकि, मुकेश की जिंदगी हमेशा आसान नहीं रही। उन्होंने अपने करियर में ऐसा दौर भी देखा, जब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें खाने तक के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

मुकेश ने अपने करियर में कई ऐसे गाने दिए, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, दम दम डिगा डिगा, कहीं दूर जब दिन ढल जाए, कभी कभी मेरे दिल में, एक प्यार का नगमा है और सुहाना सफर और ये मौसम हसीं जैसे गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। नितिन ने एक टीवी शो में अपने पिता के मुश्किल दिनों को याद करते हुए बताया था कि मुकेश की जिंदगी में ऐसे भी दिन आए, जब उनके पास खाने और यहां तक कि पानी पीने के लिए भी पैसे नहीं होते थे।

बच्चों की फीस भरने के लिए लिया था उधार

नितिन मुकेश ने बताया था कि उनके पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया, भले ही इसके लिए उन्हें किसी से मदद क्यों न लेनी पड़े। उन्होंने एक किस्सा साझा करते हुए बताया था कि एक समय मुकेश के पास उनकी और उनकी बहन की स्कूल फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे मुश्किल वक्त में मुकेश ने सब्जी बेचने वाले से पैसे उधार लेकर बच्चों की स्कूल फीस भरी थी। नितिन के मुताबिक, उनकी मां अक्सर उन्हें बताती थीं कि उनके पिता किस तरह आर्थिक परेशानियों के बीच परिवार संभाल रहे थे।

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एक्टिंग में भी आजमाया था हाथ

गायकी के अलावा मुकेश ने फिल्मों में बतौर अभिनेता भी काम किया था। उन्होंने निर्दोष, पहली नजर, माशूका और अनुराग जैसी फिल्मों में अभिनय किया। हालांकि, बतौर अभिनेता उनका करियर ज्यादा सफल नहीं रहा और उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाईं। इसके बावजूद मुकेश ने अपनी गायकी के दम पर हिंदी सिनेमा में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी याद किया जाता है। 27 अगस्त 1976 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी आवाज और सदाबहार गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं।

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