सौरभ शुक्ला (फोटो-सोशल मीडिया)
Saurabh Shukla Birthday Special Story: हिंदी सिनेमा में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो समय के साथ और भी यादगार बन जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार है ‘कल्लू मामा’, जिसे निभाकर सौरभ शुक्ला ने अपनी अलग पहचान बनाई। दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म से उन्हें यह नाम मिला, उसमें वह सिर्फ अभिनेता ही नहीं बल्कि लेखक भी थे।
सौरभ शुक्ला का जन्म 5 मार्च 1963 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। सौरभ शुक्ला आज अपना 63वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके घर में कला और संगीत का माहौल था। उनकी मां जोगमाया शुक्ला देश की पहली महिला तबला वादक मानी जाती थीं, जबकि उनके पिता शत्रुघ्न शुक्ला शास्त्रीय गायक थे। बचपन में ही उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया, जहां उनकी पढ़ाई-लिखाई पूरी हुई।
बचपन से अभिनय का शौक रखने वाले सौरभ ने पढ़ाई के बाद थिएटर का रुख किया। 1984 में उन्होंने रंगमंच से अपने करियर की शुरुआत की। थिएटर ने उन्हें अभिनय की गहराई और संवाद की ताकत समझाई। फिल्मों में उन्हें पहला बड़ा मौका शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में मिला। छोटा लेकिन प्रभावी रोल निभाकर उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
हालांकि असली पहचान उन्हें 1998 में आई सत्या से मिली। इस फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर ‘कल्लू मामा’ का किरदार निभाया, जो दर्शकों के दिल में बस गया। खास बात यह रही कि उन्होंने इस फिल्म की कहानी अनुराग कश्यप के साथ मिलकर लिखी थी। अभिनेता और लेखक-दोनों भूमिकाओं में उनकी प्रतिभा साफ झलकी। ‘सत्या’ की सफलता के बाद भी उन्हें लंबे समय तक बड़े और मजबूत किरदारों का इंतजार करना पड़ा। यह इंतजार तब खत्म हुआ जब वह बर्फी! और फिर जॉली एलएलबी में नजर आए।
‘जॉली एलएलबी’ में जस्टिस सुंदरलाल त्रिपाठी की भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने पीके और रेड जैसी फिल्मों में भी दमदार अभिनय किया। आज सौरभ शुक्ला उन कलाकारों में गिने जाते हैं जो हर किरदार में जान डाल देते हैं। ‘कल्लू मामा’ से लेकर जज तक, उनका सफर साबित करता है कि प्रतिभा और धैर्य से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।