

Satluj Controversy Jaswant Singh Khalra: फेमस एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म 'सतलुज' इन दिनों देश के सिनेमाई और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चाओं में है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के साहसी जीवन और संघर्ष पर आधारित यह फिल्म रिलीज होते ही विवादों में फंस गई है। फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन महज 48 घंटों के अंदर इसे वहां से हटा दिया गया। इस अचानक उठाए गए कदम ने लोगों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले पर जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उनकी बेटी नवकीरण कौर खालड़ा ने इस पूरे विवाद पर बात करते हुए एक बेहद बेबाक बयान दिया है। नवकीरण का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म को अचानक हटाए जाने के फैसले से उन्हें जरा भी हैरानी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जब इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा था, तभी उन्होंने इसके डायरेक्टर हनी त्रेहान को आगाह कर दिया था कि इस विषय पर फिल्म बनाना और उसे दुनिया के सामने लाना कांटों भरे रास्ते पर चलने जैसा होगा।
नवकीरण कौर ने अपने पिता के संघर्ष को याद करते हुए व्यवस्था के इरादे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि उनके पिता जसवंत सिंह खालड़ा ने अस्सी और 90 के दशक में पंजाब के भीतर कथित तौर पर हुए अवैध दाह संस्कारों और फर्जी मुठभेड़ों का जो सच उजागर किया था, वह इतना मजबूत था कि आज भी सिस्टम उसे भुला नहीं पा रहा है।
साल 1995 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी किसी न किसी रूप में जारी है और फिल्म 'सतलुज' को रोकने की कोशिशें इसी बात का प्रमाण हैं कि सच से आज भी डर का माहौल है।
हालांकि, फिल्म 'सतलुज' की इस पाबंदी का एक दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है जो मेकर्स के लिए उम्मीद की किरण है। नवकीरण के मुताबिक, फिल्म को रोकने और दबाने की जितनी कोशिशें की जा रही हैं, लोग इस मुद्दे के बारे में जानने के लिए उतने ही ज्यादा उत्सुक हो रहे हैं।
साथ ही साथ उन्होंने कहा कि इस विवाद ने उल्टा लोगों का ध्यान उस दौर की कड़वी सच्चाइयों की तरफ खींचने का काम किया है। अब आम लोग इंटरनेट और किताबों के जरिए उस दौर के इतिहास को खंगाल रहे हैं, उसके बारे में खुलकर बातें कर रहे हैं और प्रशासन से तीखे सवाल भी पूछ रहे हैं।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' के भविष्य को लेकर बात करते हुए जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। नवकीरण ने साफ लहजे में कहा कि उन्होंने डायरेक्टर से पहले ही कह दिया था कि फिल्म का कोई भी कमजोर, काटा-छांटा या बदला हुआ वर्जन दर्शकों के सामने नहीं जाना चाहिए।
फिल्म 'सतलुज' पूरी तरह से कोर्ट के दस्तावेजों और पुख्ता सबूतों के आधार पर तैयार की गई है, इसलिए इसमें कुछ भी मनगढ़ंत नहीं है। परिवार का कहना है कि जब तक उनके पिता द्वारा दिए गए पच्चीस हजार लापता लोगों के आंकड़ों को कोई गलत साबित नहीं कर देता, तब तक वे अपनी बात पर पूरी मजबूती से कायम रहेंगे।