सिर्फ 9 करोड़ में बनी थी 39 साल पहले ‘रामायण’, मामूली सामान से रचे गए भव्य सीन
Ramayan को रामानंद सागर ने सिर्फ 7-9 करोड़ में तैयार किया। बिना VFX के अगरबत्ती, रूई और ग्लास पेंटिंग से इफेक्ट बनाए गए। अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया के किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हैं।
- Written By: सोनाली झा
रामायण (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Ramanand Sagar Ramayan 1987 Budget: इन दिनों नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म ‘रामायण’ को लेकर काफी चर्चा है, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में नजर आने वाले हैं। लेकिन इस बीच 1987 में आई रामायण की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, जिसे रामानंद सागर ने बेहद सीमित संसाधनों में तैयार किया था।
आज जहां नई ‘रामायण’ हजारों करोड़ के बजट में बन रही है, वहीं 39 साल पहले बनी इस टीवी सीरीज का बजट मात्र 7 से 9 करोड़ रुपये था। उस समय के हिसाब से यह बड़ी रकम थी, लेकिन आज के मुकाबले बेहद कम मानी जाएगी। इस सीरीज में कुल 78 एपिसोड थे और हर एपिसोड पर करीब 9 लाख रुपये खर्च होते थे।
बिना VFX के बनाए गए शानदार इफेक्ट्स
उस दौर में न तो आधुनिक वीएफएक्स तकनीक थी और न ही हाईटेक उपकरण। बावजूद इसके, ‘रामायण’ के मेकर्स ने अपनी रचनात्मकता से कमाल कर दिखाया। धुंध और कोहरे के लिए अगरबत्ती का धुआं इस्तेमाल किया जाता था, जबकि बादलों को दिखाने के लिए रूई का सहारा लिया जाता था। बैकग्राउंड सीन तैयार करने के लिए ग्लास पेंटिंग का उपयोग होता था, जिससे अलग-अलग दुनिया का एहसास कराया जाता था।
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मिनिएचर मॉडल से रचे गए भव्य दृश्य
स्वर्ग, पहाड़ और बड़े सेट दिखाने के लिए मिनिएचर मॉडल बनाए जाते थे। इन छोटे-छोटे मॉडलों को कैमरे के जरिए इस तरह फिल्माया जाता था कि वे असली और विशाल नजर आते थे। यही वजह थी कि सीमित संसाधनों के बावजूद सीरीज का हर सीन भव्य लगता था। इस सीरीज में अरुण गोविल ने भगवान श्रीराम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता का किरदार निभाया था। दोनों कलाकारों को दर्शकों ने इतना पसंद किया कि आज भी उन्हें इन्हीं किरदारों के लिए याद किया जाता है।
छोटी-छोटी तकनीकों से रचा गया बड़ा जादू
युद्ध और एक्शन सीन को प्रभावी बनाने के लिए उस समय SEG 2000 मशीन का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं नकली बॉडी पार्ट्स बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग होता था। इन साधारण तकनीकों के जरिए मेकर्स ने ऐसे दृश्य रचे, जो दर्शकों के दिलों में बस गए। रामायण सिर्फ एक टीवी सीरीज नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक बन गई। यह साबित करती है कि बड़े बजट से ज्यादा जरूरी है मजबूत कहानी और रचनात्मक सोच। यही कारण है कि आज भी ‘रामायण’ लोगों के दिलों में उतनी ही खास जगह रखती है।
