रामलीला में पूनम पांडे की 'मंदोदरी' की भूमिका पर छिड़ा विवाद, महंत स्वामी नारायण दास ने जताई आपत्ति

Poonam Pandey News: दिल्ली में आयोजित होने वाली लव कुश रामलीला में पूनम पांडे के मंदोदरी की भूमिका निभाने की घोषणा के बाद से विवाद खड़ा हो गया है। अब इसपर महंत स्वामी नारायण दास ने आपत्ति जताई है।
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पूनम पांडे (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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Poonam Pandey Controversy: दिल्ली में इस साल होने वाली लव कुश रामलीला 2025 में अभिनेत्री पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका निभाने के लिए चुना गया है। इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया और जनता में काफी चर्चा और विवाद शुरू हो गया है।

श्री भरत मिलाप आश्रम के महंत स्वामी नारायण दास ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामलीला समिति को किसी भी कलाकार को कोई पवित्र या धार्मिक किरदार देने से पहले उनके चरित्र, भाषा, विचार और पहनावे पर ध्यान देना चाहिए। महंत ने कहा कि मंदोदरी का चरित्र सनातन धर्म में पवित्र माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की अभद्र भाषा या अनुपयुक्त वेशभूषा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन चीजों का ध्यान नहीं रखा गया तो यह हमारे धर्म और संस्कृति के लिए हानिकारक है।

रामलीला कमेटी और संतों में मतभेद

महामंडलेश्वर हरी चेतनानंद ने भी कहा कि मंदोदरी का चरित्र बहुत पवित्र है और पंच कन्याओं जैसे अहिल्या, कुंती, द्रौपदी, मंदोदरी और तारा में शामिल है। उनका मानना है कि ऐसे पवित्र पात्रों का अभिनय कलाकारों द्वारा करना अनुचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे समाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और इसे रोकने के लिए सावधानी बरती जानी चाहिए।

वहीं, भाजपा विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने पूनम पांडे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कलाकार का काम अभिनय करना है और किसी भूमिका को निभाने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। नेगी ने कहा, “यदि पूनम पांडे मंदोदरी की भूमिका निभा रही हैं तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। कलाकार अपने पेशे का पालन कर रहे हैं।”

लव कुश रामलीला का भव्य मंचन लाल किला मैदान, दिल्ली में 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक होगा। इस दौरान नवरात्रि और दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले दर्शक रंग-बिरंगे मंचन, नृत्य और संगीत का आनंद लेंगे।

पूनम पांडे की मंदोदरी की भूमिका पर उठे सवाल

हालांकि, पूनम पांडे की भूमिका पर उठे विवाद ने यह सवाल खड़ा किया है कि पारंपरिक धार्मिक पात्रों का आधुनिक कलाकारों द्वारा अभिनीत होना कितनी सीमा तक उचित है। इस मामले पर समाज और धर्मगुरुओं के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन शो की तैयारी और आयोजन पूरी तरह से जारी है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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