Pandit Ravi Shankar: महात्मा गांधी के निधन पर पंडित रविशंकर को मिली थी चुनौती
Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: पंडित रवि शंकर सितार वादक थे, लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के तौर पर की थी। आइए जानते हैं पंडित रविशंकर से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
- Written By: अनिल सिंह
पंडित रवि शंकर सितार वादक थे, लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के तौर पर की थी
Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: पंडित रवि शंकर का जन्म 7 अप्रैल 1920 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। पंडित रवि शंकर ने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के तौर पर की थी। लेकिन उनका मन सितार में लग गया था और आखिरकार उन्होंने 1938 में एक अहम फैसला लिया, संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार वादन सिखने के लिए उन्होंने नृत्य को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। वह पहले भारतीय अंतरराष्ट्रीय संगीतकार बने, उन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी बड़े अवार्ड जीते हैं। महात्मा गांधी के निधन पर उनके सामने एक विकट चुनौती आ गई थी उन्हें बिना तबले की थाप के सितार बजाना था।
महात्मा गांधी की निधन पर श्रद्धांजलि के वक्त रवि शंकर को बिना तबले के सितार बजाने की चुनौती मिली, तब रवि शंकर नेगा, नि धा, राग बजाई इसके लिए उन्होंने तीसरे, सातवें और छठे सुर का इस्तेमाल किया। इस राग को उन्होंने मोहनकैंस नाम दिया, क्योंकि इस राग में गांधी के नाम के सुर निकले थे, इतना ही नहीं पंडित रवि शंकर ने कई ऐसी धुनें बनाई जो देश की पहचान बन गई। दूरदर्शन की सिग्नेचर ट्यून रवि शंकर प्रसाद की बनाई हुई है।
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रवि शंकर के बारे में एक मशहूर किस्सा यह भी है कि मशहूर बीटल्स बैंड भी उनके संगीत का दीवाना था। बीटल्स बैंड के गिटारिस्ट जॉर्ज हैरिसन रवि शंकर के पास सितार सीखने आए थे। उनकी भारत यात्रा को लेकर रवि शंकर प्रसाद में उनसे कहा था कि भारत में वह भेष बदलकर आए ताकि लोग उन्हें पहचान ना सके, जिससे उनके संगीत सीखने में आसानी होगी। रवि शंकर प्रसाद उन्हें श्रीनगर ले गए थे, जहां वोट हाउस में रहकर रवि शंकर प्रसाद ने उन्हें सितार वादन सिखाया था।
पंडित रवि शंकर ने अपने करियर में कई प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया, जिनमें येहुदी मेनूहिन, जॉर्ज हैरिसन और फिलिप ग्लास शामिल हैं। उन्होंने कई प्रसिद्ध एल्बम रिकॉर्ड किए, जिनमें “वेस्ट मीट्स ईस्ट” और “रागा” शामिल हैं।
पंडित रवि शंकर को उनके काम के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें तीन ग्रैमी अवार्ड्स शामिल हैं। उन्हें 1999 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
पंडित रवि शंकर का निधन 11 दिसंबर 2012 को हुआ था। उनकी विरासत आज भी जीवित है और उनके संगीत को दुनिया भर में पसंद किया जाता है।
पंडित रवि शंकर की कुछ प्रसिद्ध रचनाएं:
– वेस्ट मीट्स ईस्ट (एल्बम)
– रागा (एल्बम)
– गंधार (राग)
– भैरव (राग)
– तीन राग (एल्बम)
पंडित रवि शंकर की विरासत:
– उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनिया भर में प्रसिद्ध बनाया।
– उन्होंने पश्चिमी और भारतीय संगीत के बीच एक सेतु का निर्माण किया।
– उन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया और उनके संगीत को प्रभावित किया।
