जिनके नृत्य के वक्त घुंघरू भी करते थे बात, ऐसे थे बॉलीवुड को नचाने वाले बिरजू महाराज (सौ. सोशल मीडिया)
मुंबई: पंडित बिरजू महाराज कथक की दुनिया का वो नाम है जिसे कोई भूला नहीं सकता। एक ऐसी शख्सियत जिनकी घुंघरू की एक-एक थाप अपने में पूरा संगीत थी। जो नृत्य करते थे, तो उनके घुंघरू बोलते थे। ताल और घुंघरू का तालमेल नृतक के लिए आम बात है, पर जब बात की जाए बिरजू महाराज की, तो उनके घुंघरू की आवाज दर्शकों का मन मोह लेती थी। कोई भी दर्शक उनके नृत्य से बोर नहीं हो सकता था। आज बिरजू महाराज का जन्मदिन है। जानते हैं उनके बारे में खास बातें।
बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 में हुआ था। वे लखनऊ के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम जगन्नाथ महाराज और माता का नाम अम्मा महाराज था। उन्होंने महज 3 साल की उम्र से अपने पिता से नृत्य की दीक्षा लेनी शुरू की थी। महाराज के 9 साल के होते ही उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद भी बिरजू महाराज ने नृत्य नहीं छोड़ा। उन्होंने आगे की दीक्षा अपने चाचा आचार्य शंभू और लच्छू महाराज से ली। कुछ सालों बाद ही वे दिल्ली आ गए और वहां उन्होंने संगीत भारती में बच्चों को कथक सिखाना शुरू किया।
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पंडित बिरजू महाराज को कथक के अलावा तबला, पखावज, नाल और सितार में भी महारत हासिल थी। इसके साथ ही वे गायक और चित्रकार भी थे। वे हर कला में निपुण थे। उन्होंने कथक को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में नृत्य स्कूल कलाश्रम की स्थापना की, जहां न सिर्फ कथक बल्कि उससे संबंधित सभी विषयों की शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने कथक को नई पहचान दिलाई। इतना ही नहीं, उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अपने डांस का जलवा बिखेरा है।
बिरजू महाराज ने कई फिल्मों में नृत्य का निर्देशन किया है। उन्होंने सत्यजीत रे की शास्त्रीय फिल्म “शतरंज के खिलाड़ी”, यश चोपड़ा की फिल्म “दिल तो पागल है”, “गदर: एक प्रेम कथा” और “देढ़ इश्किया” में नृत्य का निर्देशन किया है। इसके अलावा, उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म “देवदास” में माधुरी दीक्षित को और “बाजीराव मस्तानी” में दीपिका पादुकोण को भी नृत्य की शिक्षा दी थी।
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पंडित महाराज ने कथक के साथ अपने लंबे सफर में कई प्रसिद्धियां बटोरी हैं। उन्हें साल 1986 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी और कालिदास सम्मान से भी नवाजा गया था। इसके बाद उन्हें 2002 में लता मंगेशकर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। फिर साल 2012 में सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार फिल्म “विश्वरूपम” से भी उन्हें सम्मानित किया गया। इसके बाद 2016 में पंडित बिरजू महाराज को हिंदी फिल्म “बाजीराव मस्तानी” में “मोहे रंग दो लाल” गाने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।