पिता की एक सलाह ने बदली राज कपूर की जिंदगी, स्पॉटबॉय से की शुरुआत, फ्लॉप फिल्मोंं का भी किया सामना
राज कपूर ने अपने करियर की शुरुआत एक हेल्पर के तौर पर की थी। उनके पिता पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें नीचे से शुरुआत करने की सलाह दी थी। राज कपूर ने 17 साल की उम्र में फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटब्वॉय का काम शुरू किया था।
- Written By: अदिति भंडारी
राज कपूर (सौ. सोशल मीडिया)
मुंबई: हिंदी फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे राज कपूर। जिनको आज भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में जाना जाता है। राज कपूर को शोमैन के नाम से भी जाना जाता है। राज कपूर का काम जितना निराला है, उनकी ही निराली उनके करियर की शुरुआत है। फिल्म जगत के इतने बड़े परिवार से होने के बाद में भी राज कपूर ने अपने करियर की शुरुआत एक हेल्पर के तौर पर की थी।
पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे राज कपूर। जब वे अपने पिता के साथ मुंबई आए, तब उन्हें उनके पिता ने एक मंत्र दिया था। उन्होंने कहा था कि राजू, नीचे से शुरुआत करोगे तो ऊपर तक जाओगे। पिता की इस बात का राज कपूर ने गांठ बांध ली।
स्पॉटबॉय तौर पर किया काम
राज कपूर ने 17 साल की उम्र में रंजीत मूवीकॉम और बांबे टॉकीज फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटबॉय के तौर पर काम शुरू किया। उस समय के मशहूर निर्देशक में शुमार केदार शर्मा की एक फिल्म में क्लैपर ब्वॉय के रूप में काम करते थे। एक बार राज कपूर ने इतनी जोर से क्लैप किया कि नायक की नकली दाड़ी क्लैप में फंसकर बाहर आ गई और केदार शर्मा ने गुस्से में आकर राज कपूर को जोरदार चांटा मार दिया। इसके बाद केदार ने अपनी ही फिल्म नीलकमल में राज कपूर को बतौर नायक लिया।
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राज कपूर का शुरुआती करियर
1947 में नीलकमल से उन्हें बड़े ब्रेक मिला। इस फिल्म में वे उस समय की मशहूर एक्ट्रेस मधुबाला के साथ काम कर चुके थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में अर्ध हिट साबित हुई थी। इस फिल्म के बाद उनकी अन्य रिलीज जैसे जेल यात्रा, दिल की रानी और चित्तौड़ विजय ने सिनेमाघर में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।
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इसके बाद 1948 में, उन्होंने अपना खुद का बैनर आरके फिल्म्स की स्थापना की और संगीत नाटक ‘आग’ के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने नरगिस, प्रेमनाथ और कामिनी कौशल के साथ अभिनय किया। इस फिल्म ने एक औसत कमाई की, लेकिन आलोचकों से सकारात्मक समीक्षा प्राप्त हुई।
राज कपूर का स्टारडम
साल 1949 में फिल्म जगत के शोमैन को करियर की दिशा मिल गई। उनकी पहली रिलीज़ सुनहरे दिन बिजनेस के नजरिए से फ्लॉप रही, लेकिन अगली फिल्म परिवर्तन ने ठीक-ठाक कमाई कर ली। इसके बाद उनकी तीसरी रिलीज़ ‘अंदाज’, जिसमें दिलीप कुमार और नरगिस भी थे, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में ब्लॉकबस्टर बन गई। इन फिल्मों के बाद राज कपूर की फिल्में बॉक्स ऑफिस में अच्छी खासी चलने लगीं।
फिर आई करियर में गिरावट
एक्टर के रूप में 1966 के बाद की फिल्में जैसे अराउंड द वर्ल्ड और सपनों का सौदागर बॉक्स ऑफिस में फ्लॉप रहीं। 1970 में, उन्होंने मेरा नाम जोकर का निर्देशन और अभिनय किया, जो बॉक्स ऑफिस पर एक आपदा थी। इस फिल्म के लिए राज कपूर ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। इस फिल्म ने उनके फिल्म निर्माण स्टूडियो को लगभग दिवालिया बना दिया। बाद में इस फिल्म ने एक पंथ का निर्माण किया और इसे एक गलत समझी गई फिल्म के रूप में स्वीकार किया गया। अब यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है।
इसके बाद अगले साल उनका स्टूडियो फिर से चल निकला जब उन्होंने अपने बेटे रणधीर कपूर के करियर की शुरुआत पारिवारिक ड्रामा कल आज और कल से की। इस फिल्म ने कपूर परिवार की तीन पीढ़ियों को एक साथ लाया, जिसमें पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर और रणधीर मुख्य भूमिकाओं में थे और साथ ही रणधीर की होने वाली पत्नी बबीता भी थीं।
