खुद को विश्वगुरु कहने वालों…नसीरुद्दीन शाह के निशाने पर नरेंद्र मोदी, बोले- घमंड मुझे बिल्कुल पसंद नहीं
Naseeruddin Shah News: नसीरुद्दीन शाह ने एक लेख में मुंबई यूनिवर्सिटी से कार्यक्रम में न बुलाए जाने पर नाराजगी जताई और मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सत्ता के दुरुपयोग पर खुलकर सवाल उठाए।
- Written By: स्नेहा मौर्या
नसीरुद्दीन शाह, पीएम मोदी फोटो-सोर्स, सोशल मीडिया)
Naseeruddin Shah Blames Modi Government: बॉलीवुड के दिग्गज और बेबाक अभिनेता नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अपने तीखे बयान को लेकर चर्चा में हैं। 75 वर्षीय अभिनेता ने एक अंग्रेजी अखबार के लिए लिखे लेख में केंद्र की मोदी सरकार और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। लेख की शुरुआत उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी के ‘जश्न-ए-उर्दू’ कार्यक्रम से आखिरी वक्त में हटाए जाने की घटना से की, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया।
‘जश्न-ए-उर्दू’ से हटाए जाने पर नसीरुद्दीन ने जताया दुख
नसीरुद्दीन शाह के मुताबिक, उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन एक दिन पहले बिना किसी ठोस कारण के उन्हें आने से मना कर दिया गया। उन्होंने लिखा कि वह इस इवेंट को लेकर बेहद उत्साहित थे, क्योंकि छात्रों के साथ बातचीत करना उन्हें हमेशा से पसंद रहा है। अभिनेता ने दावा किया कि बाद में यूनिवर्सिटी ने दर्शकों से यह कह दिया कि उन्होंने खुद कार्यक्रम में आने से इनकार किया, जो उन्हें और ज्यादा आहत कर गया।
‘स्टूडेंट्स से मैंने सबसे ज्यादा सीखा’
अपने लेख में नसीरुद्दीन शाह ने शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ बिताए समय को अपने करियर का सबसे अहम अनुभव बताया। उन्होंने लिखा कि पिछले 40 वर्षों में उन्होंने जितना सीखा है, उतना किसी एक्टिंग टीचर से नहीं, बल्कि छात्रों के साथ काम करके सीखा है। युवा कलाकारों को गाइड करना उनके लिए हमेशा खास रहा है।
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मोदी सरकार पर साधा निशाना
अभिनेता ने लेख में साफ कहा कि उन्होंने कभी खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वाले नेता की तारीफ नहीं की। उन्होंने सत्ता के घमंड और असहिष्णुता पर सवाल उठाते हुए लिखा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार के किसी भी काम से वह प्रभावित नहीं हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना सरकार की है, देश की नहीं।
‘देश के खिलाफ बोले’ के आरोप को दी चुनौती
नसीरुद्दीन शाह ने एक सीनियर यूनिवर्सिटी अधिकारी के उस बयान को भी चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि वह देश के खिलाफ बोलते हैं। अभिनेता ने साफ कहा कि अगर ऐसा है, तो एक भी ऐसा बयान दिखाया जाए, जिसमें उन्होंने देश की बुराई की हो।
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लेख के अंत में नसीरुद्दीन शाह ने बढ़ती नफरत, असहमति को देशद्रोह बताने की प्रवृत्ति और जॉर्ज ऑरवेल की किताब 1984 का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि पहले जो नफरत कुछ मिनटों तक सीमित रहती थी, वह अब 24 घंटे का माहौल बन चुकी है।
