Singer Master Madan: सिर्फ 8 गाने…और अमर हो गए मास्टर मदन, आज भी रहस्यमयी है मौत की गुत्थी
Master Madan Death Mystery:आज हम आपको एक ऐसे सुपरस्टार के बारें में बताएंगे जो मात्र 3.5 साल में अपनी शानदार गायकी के कारण दुनियाभर में मशहूर हो गया था। लेकिन उनकी मौत की गुत्थी अब भी अनसुलझी है..
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
मास्टर मदन- फाइल फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Classical Music Legend Master Madan Biography: गजल और गीत के उस्ताद मास्टर मदन को कौन नहीं जानता होगा…मात्र 14 साल की छोटी उम्र में दुनिया से अलविदा कहने वाले इस शानदार कलाकार के मौत की गुत्थी आज भी अनसुलझी है।
भारतीय संगीत के इतिहास में बेहद कम उम्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले मास्टर मदन गजल और शास्त्रीय गानों के लिए प्रसिद्ध हुए। उन्होंने अपनी मधुर आवाज से पूरे देश को मंत्रमुग्ध कर दिया था। हालांकि, महज 14 वर्ष की उम्र में उनका रहस्यमयी निधन आज भी कई सवाल उठाते हैं।
जीवन परिचय
मास्टर मदान का पूरा नाम मदन सिंह था। उनका का जन्म 28 दिसंबर 1927 को पंजाब के खानखाना गांव (शहीद भगत सिंह नगर) में एक साधारण सिख परिवार में हुआ था। सरदार अमर सिंह और माता पूरन देवी के घर जन्मे मदन में बचपन से ही संगीत की प्रतिभा झलक रही थी।
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मात्र ढाई वर्ष की उम्र में मचा दी धूम
मात्र ढाई-तीन वर्ष की उम्र में मदन ने गाना शुरू किया और देखते ही देखते पूरे भारत में उनके गाए गानों ने धूम मचा दी। शिमला, दिल्ली, लाहौर, अंबाला समेत कई शहरों में उनके कार्यक्रमों में भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। उनकी आवाज में शास्त्रीय गहराई, गजल की नजाकत और लोक मिठास का अनोखा संगम था।
सिर्फ 8 गानों औऱ अमर हो गए मदान
मास्टर मदन ने अपने जीवनकाल में केवल आठ गाने ही रिकॉर्ड किए, मास्टर मदन की गजलें जैसे ‘यूं न रह रह कर हमें तरसाइए’ और ‘हैरत से तक रहा है जहां-ए-वफा मुझे’ आज भी लोगों के दिलों पर छपी हुई है। मदन अब हमारे बीच नही है लेकिन उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
शिक्षा
मास्टर मदन ने शिमला के सनातन धर्म स्कूल से अपनी शुरूआती पढ़ाई की। इसके बाद मदन जब बड़े हुए तो उनका परिवार दिल्ली आ गया। यहां रामजस स्कूल से मदन ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। 1931 से लेकर 1942 तक मास्टर मदन ऑल इंडिया रेडियो में गाते रहे। इस दौरान गुलाम अली खान, मुबारक अली, फतेह अली दिलीप चंदरवेदी और दीना क़व्वाल जैसे दिग्गज सिंगर्स भी ऑल इंडिया के लिए गाया करते थे।
14 साल में बने सिंगिंग के बादशाह
अपनी आवाज से सैकड़ों गानों को तराशने वाले मास्टर मदन 14 साल में ही सिंगिंग के बादशाह बन गए थे। ऐसा कहा जाता है कि बड़े- बड़े सिंगर्स को उनसे जलन होने लगी थी। इतना ही नहीं उनकी गायकी और लोकप्रियता से कई दिग्गज सिंगर्स के करियर पर खतरा मंडराते लगा।
रहस्मयी मौत
जानकारी के मुताबिक वर्ष 1942 में मास्टर मदन ने कोलकत्ता में एक स्टेज परफॉर्मेंस दी। इसके बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के लिए गाना जारी रखा लेकिन इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। और कुछ ही दिनों में 5 जून 1942 को उनका निधन हो गया। कई रिपोर्ट्स बताते हैं कि उन्हें किसी ने दूध में पारा घोलकर पिला दिया था। उनकी मौत आज भी अनसुलझी पहेली बनी हुई है। उनकी मौत ने सबको को झकझोर दिया था।
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बता दें कि मास्टर मदन को उनके सारे स्वर्ण पदकों सहित समाधि दी गई। उनकी मां पूरन देवी उनकी मौत का सदमा सहन ना कर सकी और कुछ समय बाद वो भी चल बसीं। मात्र 14 वर्ष 5 महीने में उन्होंने अपनी गायकी से लोगों को अपना दिवाना बना लिया था। मास्टर मदन ने मात्र आठ गीतों को ही गाए लेकिन उनके स्वर आज भी भावुक कर देते है। हैरत की बात तो यह है कि उनके 8 गानों में से मात्र 4 गाने के ही रिकॉर्ड मिलते है।
