मिस यूनिवर्स इंडिया मणिका बनीं सीता, मनोज तिवारी बने बाली, अयोध्या में फिल्मी रामलीला
Ramleela in Ayodhya: अयोध्या के रामजन्मभूमि के रामकथा पार्क में भव्य फिल्मी रामलीला का आयोजन हुआ। इस बार मिस यूनिवर्स इंडिया मणिका विश्वकर्मा सीता बनीं और मनोज तिवारी बाली की भूमिका में नजर आए।
- Written By: सोनाली झा
मिस यूनिवर्स इंडिया मणिका बनीं सीता
Miss Universe India Manika plays Sita: नवरात्रि के आगमन के साथ देशभर में रामलीला के मंच सज गए हैं और अयोध्या में भी भव्य फिल्मी रामलीला का उद्घाटन सोमवार को किया गया। रामजन्मभूमि के रामकथा पार्क में आयोजित इस रामलीला का यह आयोजन दर्शकों को अपने भव्य मंच और अत्याधुनिक 3डी तकनीक के साथ मंत्रमुग्ध कर रहा है। इस बार रामलीला में कई फिल्मी सितारे और दिग्गज हस्तियां मुख्य किरदारों के रूप में नजर आए।
120 फुट ऊंचे मंच पर प्रस्तुत रामलीला में नारद मुनि की मोह की कथा का नाटकीय मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को लुभाया। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, यह रामलीला 2 अक्टूबर तक चलेगी। इसकी सिनेमाई शैली की शुरुआत पहली बार 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी और तब से यह हर साल नई तकनीक और भव्यता के साथ दर्शकों का आकर्षण बनती रही है।
फिल्मी सितारों का शानदार प्रदर्शन
इस वर्ष मिस यूनिवर्स इंडिया मणिका विश्वकर्मा देवी सीता की भूमिका में नजर आएंगी, जबकि अभिनेता राहुल भुचर भगवान राम के किरदार में हैं। दिग्गज अभिनेता विजय सक्सेना रावण बनेंगे। सांसद मनोज तिवारी बाली के रूप में मंच पर होंगे और रवि किशन केवट की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, बिंदू दारा सिंह भगवान शिव का किरदार निभा रहे हैं और पुनीत इस्सर परशुराम के रूप में दर्शकों के सामने होंगे।
पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
रामलीला आयोजक सुभाष मलिक ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। रामकथा पार्क में हर शाम हजारों पर्यटक जुटते हैं, और इसे कई प्लेटफॉर्म्स पर लाइव प्रसारित किया जाता है। पिछले साल अकेले 47 करोड़ लोगों ने इसे टीवी और ऑनलाइन देखा।
रावण दहन का आकर्षक आयोजन
अयोध्या की रामलीला का सबसे बड़ा आकर्षण रावण दहन होगा। इस बार 240 फुट ऊंचा रावण का पुतला जलाया जाएगा। इसके अलावा 190 फुट ऊंचे मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी किया जाएगा। चार राज्यों से आए 60 कारीगरों ने इन विशाल पुतलों को पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक के संयोजन से तैयार किया।
