लोहड़ी का जश्न बड़े पर्दे पर (फोटो-सोशल मीडिया)
Lohri In Hindi films: हर साल 13 जनवरी को मनाया जाने वाला लोहड़ी का पर्व पंजाब और हरियाणा की संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है। लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि लोकगीतों, भांगड़ा-गिद्धा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है। यह पर्व शरद ऋतु के अंत और नई फसल के स्वागत के साथ-साथ गर्मी के आगमन का संकेत देता है। समय के साथ लोहड़ी की लोकप्रियता पंजाब-हरियाणा की सीमाओं से निकलकर पूरे देश में फैल चुकी है। यही वजह है कि हिंदी सिनेमा में भी इस त्योहार की झलक कई बार देखने को मिली है।
बॉलीवुड फिल्मों में लोहड़ी के सीन न सिर्फ कहानी को सांस्कृतिक रंग देते हैं, बल्कि दर्शकों को पंजाब की मिट्टी से जोड़ने का काम भी करते हैं। साल 2004 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की क्लासिक फिल्म ‘वीर-जारा’ में लोहड़ी का दृश्य बेहद भावुक और यादगार है। फिल्म के शुरुआती हिस्से में जब वीर यानी शाहरुख खान जारा यानी प्रीति जिंटा को उसके गांव ले जाता है, तब पारंपरिक अंदाज में लोहड़ी मनाई जाती है। इसी सीन में गाना ‘लो आ गई लोहड़ी वे’ सुनाई देता है, जो दर्शकों को सीधे पंजाब की संस्कृति में ले जाता है।
इसके अलावा, बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक रोमांटिक फिल्मों में से एक ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में भी लोहड़ी का खास सीन दिखाया गया है। इंटरवल के बाद आने वाले इस सीन में पूरा परिवार आग के चारों ओर बैठकर लोहड़ी के गीत गाता है। यह सीन पारिवारिक रिश्तों और भारतीय परंपराओं की गर्माहट को खूबसूरती से दर्शाता है।
साल 2011 में आई देओल फैमिली स्टारर ‘यमला पगला दीवाना’ में भी लोहड़ी का जश्न बड़े ही रंगीन अंदाज में दिखाया गया। फिल्म के एक गाने में धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल के साथ पूरा परिवार लोहड़ी मनाता नजर आता है। इस सीन में पंजाबी मस्ती और हास्य का तड़का साफ दिखाई देता है। अक्षय कुमार की फिल्म ‘पटियाला हाउस’ में भी लोहड़ी का उत्सव कहानी की शुरुआत में देखने को मिलता है। फिल्म के शुरुआती सीन में पूरा परिवार एक साथ लोहड़ी मनाता है, जो पारिवारिक एकता और परंपरा को दर्शाता है।
वहीं, ‘सन ऑफ सरदार’ में अजय देवगन के गांव लौटने के सीन में लोहड़ी की झलक दिखाई गई है, जहां रंग-बिरंगे कपड़ों में लोग भांगड़ा करते नजर आते हैं। कुल मिलाकर, बॉलीवुड ने अपनी कई फिल्मों के जरिए लोहड़ी की सांस्कृतिक रौनक को बड़े पर्दे पर जीवंत किया है। इन फिल्मों के जरिए यह त्योहार सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश के दर्शकों के दिलों तक पहुंचा है।