2 फ्लॉप फिल्मों के बाद टूटने लगी थीं उम्मीदें, फिर ‘जब वी मेट’ ने रातों-रात बदल दी Imtiaz Ali की किस्मत
Jab We Met Changed Imtiaz Ali: मशहूर फिल्म डायरेक्टर इम्तियाज अली कभी अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे। दो फ्लॉप फिल्मों के बाद फिल्म 'जब वी मेट' ने उनकी किस्मत हमेशा के लिए बदल दी।
- Written By: यति सिंह
इम्तियाज अली (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Imtiaz Ali Career Journey: बॉक्स ऑफिस पर कुछ कहानियां परदे पर दिखती हैं और कुछ कहानियां परदे के पीछे आकार लेती हैं। आज के दौर के सबसे चहेते डायरेक्टरों में शुमार इम्तियाज अली की जिंदगी भी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है।
‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी लीक से हटकर फिल्में बनाने वाले इस फनकार का झुकाव शुरुआत में डायरेक्शन की तरफ था ही नहीं। मुंबई की चमक उन्हें एक एक्टर के तौर पर खींच लाई थी। किस्मत ने उनके लिए एक बेहद अलग और शानदार रास्ता चुन रखा था। लगातार 2 फिल्मों की असफलता के बाद जब उम्मीदें टूटने लगी थीं, तब एक फिल्म ने उनकी तकदीर को पूरी तरह बदल कर रख दिया।
बॉक्स ऑफिस के करीब बीता बचपन और बदला नजरिया
झारखंड के जमशेदपुर में एक मिडिल क्लास में जन्मे इम्तियाज अली के पिता सिंचाई विभाग में काम करते थे। बचपन का शुरुआती दौर पटना में गुजरने के बाद उनका परिवार वापस जमशेदपुर आ गया।
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किस्मत से उनके एक रिश्तेदार के पास कई सिनेमाघर थे, जिनमें से एक तो उनके घर के बेहद नजदीक था। इस नजदीकी ने उनके बचपन पर गहरा असर डाला और वे फिल्मों को बहुत बारीकी से देखने लगे। यहीं से उनके भीतर सिनेमा के प्रति एक अनकहा लगाव पैदा होने लगा था, जिसने आगे चलकर उनके करियर की बुनियाद रखी।
कॉलेज के समय हुई थियेटर की शुरुआत
हाईयर एजुकेशन के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली यूनिवर्सिटी के फेमस हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज के दिनों ने उनके भीतर छिपे कलाकार को एक सही स्टेज दिया। इस दौरान उन्होंने थियेटर में पूरी शिद्दत से भाग लेना शुरू कर दिया था।
वे सिर्फ नाटकों में एक्टिंग ही नहीं करते थे, बल्कि खुद कहानियां लिखते थे और उनका डायरेक्शन भी करते थे। कॉलेज के इसी दौर में उन्होंने यह पूरी तरह साफ कर लिया था कि उनका भविष्य एंटरटेंमेंट में ही सुरक्षित है।
एक्टर बनने का सपना और याकूब मेमन का किरदार
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक्टर बनने का बड़ा सपना आंखों में सजाकर मुंबई पहुंच गए। शुरुआत में उन्होंने एक्टिंग के लिए काफी संघर्ष किया और गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम भी किए। इसी बीच उन्होंने छोटे पर्दे का रुख किया और ‘कुरुक्षेत्र’ तथा ‘इम्तिहान’ जैसे धारावाहिकों का डायरेक्शन कर कैमरे के पीछे का अनुभव हासिल किया।
एक्टिंग का मौका उन्हें साल 2004 में अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ में मिला, जहां उन्होंने याकूब मेमन की भूमिका निभाई। मगर जल्द ही उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि उनकी असली ताकत एक्टिंग नहीं बल्कि कहानियां कहना है।
2 नाकामियों के बाद जब वी मेट से आया नया मोड़
डायरेक्शन के रास्ते पर कदम बढ़ाते ही उनकी पहली फिल्म ‘सोचा न था’ को समीक्षकों की सराहना तो मिली, लेकिन सिनेमा घरों में कमाल नहीं दिखा सकी। इसके बाद आई अगली फिल्म ‘आहिस्ता आहिस्ता’ भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही।
लगातार 2 असफलताओं से निराशा बढ़ना स्वाभाविक था, लेकिन इम्तियाज हार नहीं मानी।
साल 2007 में आई फिल्म ‘जब वी मेट’ ने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए। शाहिद कपूर और करीना कपूर की एक्टिंग से सजी इस फिल्म की भारी सफलता ने इम्तियाज अली को रातों-रात देश का एक दिग्गज और चर्चित डायरेक्टर बना दिया।
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अभी हाल ही में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के अनकर्हे दर्द को समेटे डायरेक्टर इम्तियाज अली की नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ दर्शकों के दिलों को गहराई से छू रही है। अपनी बेहतरीन कहानी के दम पर इस फिल्म को सिनेमाघरों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
