

Suchandra Chandra Ikyaavan Naari Ek Ramayan: एक्ट्रेस, डायरेक्टर, निर्माता, सोशल वर्कर और प्रेरक वक्ता सुचंद्रा चंद्र, जिन्हें पेशेवर दुनिया में सुचंद्रा X वानिया के नाम से जाना जाता है, अब साहित्य जगत में अपना पहला कदम रखने जा रही हैं। उनकी पहला साहित्यिक उपन्यास 'इक्यावन नारी, एक रामायण' एक उपन्यासात्मक पुनर्पाठ के रूप में पाठकों के सामने आने वाला है।
यह उपन्यास सनातनी महाकाव्य रामायण के परिचित घटनाक्रम को एक नए और संवेदनशील नारी-दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की कोशिश करता है। इसमें रामायण से जुड़ी 51 महिलाओं के जीवन, उनके त्याग, पीड़ा, विवेक और आंतरिक शक्ति को मुख्य धारा में लाकर उजागर किया जाएगा।
महाकाव्य रामायण केवल पुरुष पात्रों की वीरता, राजधर्म या युद्ध की कहानी मात्र नहीं है। इसके हर जरूरी मोड़ पर नारी शक्ति की गहरी और बहुआयामी उपस्थिति मौजूद रही है। सीता, कैकेयी, कौशल्या, सुमित्रा, मंदोदरी, शूर्पणखा, उर्मिला, तारा और अहिल्या जैसे प्रसिद्ध और स्थापित पात्रों के साथ-साथ इतिहास में कई महिलाओं की आवाजें कहीं पीछे छूट गईं।
इस उपन्यास की खास बात यह है कि इसमें हर एक महिला को किसी की पत्नी, माता, पुत्री और बहन के दायरा-मात्र से इतर एक स्वतंत्र और सशक्त व्यक्तित्व के रूप में देखा गया है।
इस उपन्यास की इन महिलाओं का जीवन सिर्फ प्राचीन महाकाव्य रामायण के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी हम अपने आसपास की महिलाओं में उनके अक्स को देख सकते हैं। कभी उर्मिला की मौन प्रतीक्षा में, कभी रामायण की माता सीता के स्वाभिमान में, कभी मंदोदरी की बुद्धिमत्ता में, तो कभी शूर्पणखा के भावनात्मक घावों में आज की नारी के संघर्षों और आत्मसम्मान की झलक मिलती है।
लेखिका ने सनातन दर्शन और आध्यात्मिकता की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए, महिलाओं के प्रेम, सहनशीलता और विपरीत परिस्थितियों में फैसला लेने के साहस को बहुत ही सहज और मानवीय भाषा में पिरोया है।
एक समाजसेवी और प्रेरक वक्ता के रूप में सुचंद्रा चंद्र ने महिलाओं के अलग-अलग संघर्षों और सामाजिक वास्तविकताओं को बहुत करीब से देखा है। उनके इन्हीं अनुभवों ने इस उपन्यास के चरित्र-निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। सनातन दर्शन के अनुसार नारी कभी कमजोर नहीं रही, वह सृष्टि का मूल स्रोत है।
यह किताब प्राचीन पात्रों को उनके सामाजिक परिवेश में रखते हुए आधुनिक संवेदनाओं से जोड़ती है। यह उपन्यास भुला दी गई महिलाओं की खोज और सनातनी महाकाव्य को एक नए नारी-दृष्टिकोण से देखने का एक यादगार कोशिश है।