Ikkis Movie Review: देशभक्ति के जज्बे से भरी अगस्त्य नंदा की ये फिल्म, धर्मेंद्र-जयदीप ने किया भावुक
Ikkis Movie Review: श्रीराम राघवन निर्देशित 'इक्कीस' 1971 के युद्ध हीरो अरुण खेत्रपाल की वीरता पर आधारित है। अगस्त्य नंदा, धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत का दमदार अभिनय इस देशभक्ति फिल्म को खास बनाता है।
- Written By: अनिल सिंह
Ikkis Movie Review: (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Ikkis Movie Review: निर्देशक श्रीराम राघवन ने अपनी फिल्म ‘इक्कीस’ के साथ एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह भावनाओं और थ्रिलर को कैसे बखूबी मिलाते हैं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जीवनगाथा पर आधारित यह वॉर ड्रामा देशभक्ति के जज्बे और बलिदान की एक बेहद भावुक दास्तां है।
- फिल्म: इक्कीस
- स्टारकास्ट: अगस्त्य नंदा, सिमर भाटिया, राहुल देव, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और धर्मेंद्र
- निर्माता: दिनेश विजन (मैडॉक फिल्म्स)
- निर्माता: श्रीराम राघवन
- रनटाइम: 2 घंटे 27 मिनट
- रेटिंग्स: 4 स्टार्स
कहानी: ये कहानी है भारतीय सेना के पूना हॉर्स रेजिमेंट में एक टैंक कमांडर अरुण खेत्रपाल की जिन्होंने महज 21 साल की उम्र में 6 दिसंबर 1971 को शकरगढ़ सेक्टर में हुए भीषण युद्ध में पाकिस्तानी सेना का न सिर्फ डटकर मुकाबला किया बल्कि उनके 10 टेंकों को भी तबाह कर दिया था। फिल्म में उनका किरदार निभाया है अगस्त्य नंदा ने तो वहीं उनकी प्रेमिका की भूमिका में हैं सिमर भाटिया। इसी के साथ अरुण के पिता की भूमिका में हैं दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र। फिल्म में दिखाया गया है कि किस प्रकार अरुण शुरू से ही अपने लक्ष्य को लेकर बेहद अनुशासन में रहना पसंद करते हैं और पूरी तरह से आर्मी के लिए प्रशिक्षित न होने के बावजूद अपनी बुद्धिमत्ता और जज्बे से रणभूमि में टेंक में सवार होकर पाकिस्तानी फ़ौज का सामना करते हैं। फिल्म में दिखाया गया कि गंभीर रूप से घायल होने और टैंक में आग लगने के बावजूद, अरुण ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। उन्होंने अंतिम समय तक दुश्मन के टैंकों पर गोलाबारी जारी रखी और पाकिस्तान के जवाबी हमले को पूरी तरह विफल कर दिया। उनके इसी पराक्रम के कारण उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से नवाजा गया।
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परफॉर्मेंस: भावुक कर गए धर्मेंद्र
अगस्त्य नंदा (अरुण खेत्रपाल): अगस्त्य नंदा ने बेहतरीन काम किया है। खासतौर पर क्लाइमेक्स के युद्ध दृश्यों में, जहाँ वह पूरे जोश में हुंकार भरकर लड़ते हैं, वह आपको उनकी प्रतिभा का कायल बना देंगे।
धर्मेंद्र: अरुण के पिता की भूमिका में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र बड़प्पन, देशप्रेम और सादगी से ओतप्रोत नजर आते हैं। यकीनन, अपनी अंतिम फिल्म तक वह कलाकारों को एक्टिंग का गुर सिखा गए। उनका प्रेजेंस भी दर्शकों को भावुक करता है।
जयदीप अहलावत: पाकिस्तानी अफसर के किरदार में जयदीप अहलावत ने गंभीरता के साथ हमें खूब इम्प्रेस किया है।
अन्य कलाकार: सिमर भाटिया अपने किरदार में ढली नजर आईं, वहीं सिकंदर खेर का काम भी मनोरंजक रहा।
म्यूजिक और डायलॉग्स
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड डिजाइन वाकई शानदार है। वॉर के सीन्स में गोलियों की आवाज थिएटर में बेहद दमदार लगती है। विशाल मिश्रा और अरिजीत सिंह के गाने भी सुकून से भरे हैं। फिल्म के संवाद इसकी जान हैं। क्लाइमेक्स में अरुण का डायलॉग, “मेरी गन अभी काम कर रही है, मैं इनसे निपटता हूं। मेरी टैंक एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी” आपके रोंगटे खड़े कर देगा।
फाइनल टेक
‘इक्कीस‘ सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह बलिदान और देशप्रेम का एहसास कराती है। यह एक इमोशन और देशभक्ति से भरी फिल्म है जिसे आप थिएटर में जरूर एन्जॉय करेंगे।
