

Ritesh Sidhwani Boong Movie: भारतीय सिनेमा के बड़े क्षितिज पर जहां ज्यादातर निर्माता केवल घिसे-पिटे फॉर्मूलों पर पैसा लगाने को सुरक्षित मानते हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो जोखिम उठाकर नई सोच को मंच देते हैं। रितेश सिधवानी एक ऐसा ही नाम हैं, जिन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर के जरिए हमेशा लीक से हटकर बनाई जाने वाली फिल्मों को प्राथमिकता दी है। आज उनके जन्मदिन पर केवल उनकी सफलताओं का ही नहीं, बल्कि सिनेमा में उनके द्वारा लाई गई क्रांति का त्योहार मनाने का दिन है। हाल के दिनों में रिलीज हुई मणिपुरी फिल्म 'बूंग' उनकी इसी दूरदर्शी सोच और सिनेमाई समझ का सबसे सशक्त और उदाहरण प्रस्तुत करने वाला उदाहरण बनकर उभरी है।
एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी मणिपुरी भाषा की ड्रामा फिल्म 'बूंग' पर दांव लगाना रितेश सिधवानी के साहस का ही परिचायक था। उत्तर-पूर्व की एक प्रादेशिक कहानी पर इस तरह भरोसा जताना हर किसी के बस की बात नहीं होती। यह फिल्म एक छोटे मासूम बच्चे की कहानी बयां करती है, जो अपनी मां के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए दुनिया का सबसे खास तोहफा देने की ठान लेता है। वह तोहफा होता है उसके बिछड़े हुए पिता को खोजकर घर वापस लाना। यह बेहद सरल, भावुक और सीधे दिल को छू लेने वाली कहानी है, जिसे रितेश के मजबूत सपोर्ट ने दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा दिया।
रितेश सिधवानी का यह अटूट विश्वास उस समय एक ऐतिहासिक स्वर्णिम क्षण में बदल गया जब 'बूंग' ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का झंडा लहराया। 79वें ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स में इस फिल्म ने बेस्ट चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म श्रेणी का प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किया। बाफ्टा जैसा बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल करने वाली यह पहली भारतीय फिल्म बनी। इसके अलावा टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अपने वर्ल्ड प्रीमियर के साथ ही इस फिल्म ने वैश्विक समीक्षकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा और भारतीय प्रादेशिक सिनेमा को एक वैश्विक गरिमा प्रदान की।
रितेश सिधवानी की यह खास कार्यशैली दर्शाती है कि वे किसी कहानी का मूल्य केवल उसके बॉक्स ऑफिस बिजनेस या पहले दिन की कमाई से तय नहीं करते। उनका मानना है कि यदि कहानी में जान हो और उसे सही क्रिएटिव टीम का साथ मिले, तो वह हर सीमा को तोड़ सकती है। वे ट्रेंड बनने का इंतजार करने के बजाय खुद एक नया ट्रेंड स्थापित करने में विश्वास रखते हैं।