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फिल्म: गौरैया लाइव
कास्ट: अदा सिंह, ओंकार दास मानिकपुरी, सीमा सैनी, नरेंद्र खत्री, शगुफ्ता अली, विनय झा
निर्देशक: गेब्रियल वत्स
रनटाइम: 111 मिनट
रेटिंग: 3 स्टार्स
कहानी: ये कहानी भोपाल में बेस्ड है जहां एक निर्माण स्थल पर एक मजदूर रामपाल अपनी बेटी गौरैया के लिए बेहतर जीवन का सपना देखते हुए काम कर रहा है। एक मनहूस दिन गौरैया एक बोरवेल में गिर जाती है। उधर गौरैया की बड़ी बहन, सपना की ज़िंदगी भी उथल-पुथल के कगार पर खड़ी है। दहेज की माँग के बोझ तले अमित के साथ उसकी शादी टूट गई, जिससे उसका दिल भी टूट गया और वह निराश हो गई है। 36 घंटों तक गौरैया दम घुटने वाले अंधेरे में उम्मीद का चिराग लिए सांसें लेती रही। और जब गौरैया बोरवेल से बाहर आई, तो सारा जग खुशी से झूम उठा।
अभिनय: अदा सिंह, , सीमा सैनी और नरेंद्र खत्री ने अपने अपने किरदारों के साथ इंसाफ किया है। फिल्म ‘पीपली लाइव’ स्टार ओंकार दास मानिकपुरी एक बार फिर इस कहानी में हमारा दिल जीते नजर आए।
फाइनल टेक: कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मजदूरों, उनके परिवार, बच्चों की जिंदगी कितनी मुश्किल और खतरों भरी होती है फिल्म इस ओर प्रकाश डालती है। बोरवेल में गिरने वाले बच्चे के बचाव कार्य के सिलसिले में क्या क्या होता है। उन क्षणों में बच्चे की क्या मनोदशा होती है वह भी दर्शाया गया है। उसके अलावा कुछ स्टोरीज सब-प्लॉट में भी चलती रहती हैं। आज आप हर जगह देखें तो लोग ऊंची बिल्डिंग, टॉवर बना रहे हैं, मगर उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर बनाने वाले मजदूरों और उनके परिवार वालो के बारे में लोग कुछ नही सोचते। फिल्म यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है कि इस तरह से बोरवेल खुले छोड़ना क्या दुर्घटना को निमंत्रण देना नहीं है? बिल्डर, ठेकेदार इस बात का ध्यान नहीं रखते कि इसमे कोई बच्चा गिर कर अपनी जान गंवा सकता है। यह फिल्म इस गम्भीर मुद्दे को बहुत ही प्रभावी ढंग से दर्शाती है। निर्देशक गेब्रियल वत्स ने फिल्म को बांधकर रखा है फिल्म गौरैया लाइव आंख खोलने वाला सिनेमा है जो समाज को आइना दिखाने का काम करती है।