इंडस्ट्री में फिल्में क्यों होती हैं फ्लॉप, निरहुआ ने कर दिया बड़ा खुलासा
भोजपुरी सॉन्ग का क्रेज लोगों में खूब देखने को मिलता है, लेकिन फिल्म को देखने के लिए थिएटर्स में बिल्कुल भीड़ नहीं होती है। ऐसे में अब दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने एक इंटरव्यू इस पर चुप्पी तोड़ी है।
- Written By: स्नेहा मौर्या
दिनेश लाल यादव (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया
Dinesh lal yadav Nirahua: भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रियता आज भी बरकरार है, लेकिन दर्शकों की आदतें अब काफी बदल चुकी हैं। फिल्में ऑनलाइन तो लाखों व्यूज बटोर रही हैं, मगर सिनेमाघरों में वो रौनक अब नहीं देखने को मिलती है, ये बदलाव केवल भोजपुरी सिनेमा में ही नहीं, बल्कि लगभग हर रीजनल और मेनस्ट्रीम फिल्म इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है।
ऐसे में अब भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस बदलाव की वजह पर खुलकर बात की। दरअसल, निरहुआ ने मीडियो को दिए एक इंटरव्यू में निरहुआ से पूछा गया कि आखिर फिल्मों का थिएटर्स में प्रदर्शन कमजोर क्यों हो गया है? उन्होंने इस सवाल का जवाब एक दिलचस्प उदाहरण के जरिए दिया।
निरहुआ ने बताया क्यों फ्लॉप हो रही हैं फिल्में
निरहुआ ने बातचीत के दौरान कहा कि “बचपन में जब हम गांव में रहते थे, तो पूरा गांव मिलकर नहर या पोखर में नहाने जाया करता था। लेकिन अब घर-घर में नल हैं, तो लोग घर में ही नहाना पसंद करते हैं। कोई अब पोखर तक नहीं जाता।” उन्होंने आगे कहा, “आज थिएटर लोगों के हाथ में है जैसे कि मोबाइल के रूप में। अब कोई सिनेमाघर तब ही जाता है जब कोई फिल्म ‘पुष्पा 2’ जैसे स्तर की हो। यानी जब कुछ बड़ा और खास हो, तभी लोग बाहर निकलेंगे।”
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निरहुआ ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में दर्शकों को सिनेमाघर तक लाने के लिए या तो बहुत दमदार फिल्म बनानी होगी, या फिर ओटीटी का रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि “अगर फिल्म में कंटेंट और स्केल दोनों जबरदस्त नहीं हैं, तो फिर उसे ओटीटी पर रिलीज कर देना चाहिए और बजट निकाल लेनी चाहिए। यही आज का रियल सिनेमा ट्रेंड है।”
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‘इंडस्ट्री में टिकना हैं तो बदलाव के साथ चलना होगा’
इस इंटरव्यू के दौरान निरहुआ ने माना कि सिनेमाघरों की जगह अब डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ले ली है। इसलिए जरूरी है कि निर्माता और निर्देशक समय के साथ अपनी रणनीति बदलें। इसके अलावा निरहुआ ने बातचीत के दौरान यह साफ तौर पर खुलासा किया कि फिल्म इंडस्ट्री की सच्चाई को बखूबी उजागर करती हैं। बदलते वक्त के साथ दर्शकों की प्राथमिकताएं भी बदली हैं, और अगर इंडस्ट्री में टिकना है तो उसे भी इस बदलाव के साथ चलना होगा।
