दीपिका पादुकोण की ये जवानी है दीवानी को पूरे हुए 12 साल, ये 4 डायलॉग आज भी हैं यादगार
ये जवानी है दीवानी को रिलीज हुए 12 साल हो गए हैं, लेकिन इसका जादू आज भी वैसा ही बरकरार है। ये कहानी हमें कई यादगार पल और उतने ही यादगार डायलॉग्स भी दे गई है।
- Written By: सोनाली झा
दीपिका पादुकोण की ये जवानी है दीवानी को पूरे हुए 12 साल
मुंबई: दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ को आज पूरे 12 साल हो चुके हैं। समय बीत गया, लेकिन इस फिल्म का जादू आज भी उतना ही ताजा महसूस होता है। दोस्ती, प्यार, खुद की तलाश और ज़िंदगी के सफर को बेहद खूबसूरती से बयां करने वाली इस फिल्म ने न सिर्फ दिलों को छुआ, बल्कि हमें कई ऐसे डायलॉग्स भी दिए जो आज भी याद आते हैं।
यादें मिठाई के डिब्बे की तरह होती है एक बार खुला तो सिर्फ एक टुकड़ा नहीं खा पाओगे। इस लाइन में वो नॉस्टल्जिअ है जो हर किसी ने महसूस किया होगा। बीती बातें जब भी याद आती हैं, तो वो सिर्फ एक पल नहीं लातीं बल्कि पूरा एक दौर सामने आ खड़ा होता है। नैना की इस मासूम लेकिन गहरी बात ने लाखों दिलों को छुआ।
कभी-कभी कुछ बातें हमारे यादों के कमरे की इतनी खिड़कियां खोल देती है कि हम दंग रह जाते हैं। एक शायराना अंदाज़ में बीते वक्त के अचानक लौट आने की बात कहती है ये लाइन। दीपिका की नर्म लेकिन दिल को छू जाने वाली अदायगी इसे और भी असरदार बना देती है। जितना भी ट्राय करो बनी, लाइफ में कुछ न कुछ तो छूटेगा ही। तो जहां हैं, वहीं का मजा लेते हैं। ज़िंदगी का सबसे सच्चा सबक, बड़ी ही सीधी-सादी लाइन में कह दिया गया है। नैना हमें सिखाती है कि हर पल को जीना चाहिए, परफेक्शन के पीछे भागते नहीं रहना चाहिए।
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कुछ वक्त दो सब ठीक हो जाएगा। ये लाइन जैसे मुश्किल दिनों में किसी ने गले लगा लिया हो, शांत, सुकून देने वाली। नैना की यही खामोश समझदारी है जो आज भी दिल को राहत देती है। बारह साल बाद भी ये डायलॉग्स उतने ही असरदार हैं, जैसे खुद नैना आज भी पहली सी है। ‘ये जवानी है दीवानी’ केवल एक फिल्म नहीं, एक एहसास है। नैना का किरदार आज भी हमें सिखाता है कि ज़िंदगी में ठहराव, समझदारी और प्यार कितने मायने रखते हैं। 12 साल बाद भी ये फिल्म और इसके डायलॉग्स दिल में वैसे ही बसे हुए हैं, जैसे पहली बार देखे हों।
