सिर्फ 50 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे राजेंद्र कुमार, सुपरस्टार बनने के बाद भी बेचना पड़ा था अपना सबसे लकी बंगला
Rajendra Kumar Death Anniversary: 'जुबली कुमार' राजेंद्र कुमार की पुण्यतिथि पर उनकी जिंदगी का भावुक किस्सा चर्चा में है। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपना लकी 'डिंपल' बंगला राजेश खन्ना को बेचना पड़ा था।
- Written By: सोनाली झा
राजेंद्र कुमार (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Rajendra Kumar Death Anniversary Special: हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता राजेंद्र कुमार की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उनके जीवन का एक बेहद भावुक किस्सा आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है। ‘जुबली कुमार’ के नाम से मशहूर राजेंद्र कुमार ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दीं, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपना सबसे प्रिय और लकी बंगला बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
राजेंद्र कुमार का फिल्मी सफर संघर्षों से भरा रहा। अभिनेता बनने का सपना लेकर जब वह मुंबई आए, तब उनकी जेब में केवल 50 रुपये थे। यह रकम उन्होंने अपने पिता की घड़ी बेचकर जुटाई थी। शुरुआती दिनों में गीतकार राजेंद्र कृष्ण की मदद से उन्हें निर्देशक एच. एस. रवैल के सहायक के रूप में 150 रुपये मासिक वेतन पर काम मिला।
राजेंद्र कुमार का सफर
साल 1950 में फिल्म जोगन से उन्हें अभिनय का पहला मौका मिला। हालांकि पहचान उन्हें 1957 की फिल्म मदर इंडिया में छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदार से मिली। इसके बाद गूंज उठी शहनाई, धूल का फूल, मेरे महबूब, संगम, आरजू और सूरज जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। उनकी लगातार सफल फिल्मों के कारण फैंस ने उन्हें जुबली कुमार का नाम दिया।
सम्बंधित ख़बरें
लाल साड़ी में दुल्हन बनीं आकांक्षा रंजन कपूर, फिल्ममेकर शरण शर्मा संग शादी की पहली तस्वीरें हुईं वायरल
S Janaki Death: गायिका एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में निधन, छोड़ गईं 48 हजार से ज्यादा गीतों की विरासत
रामायण का ट्रेलर इस दिन देगा दस्तक, रणबीर कपूर के भगवान श्रीराम अवतार का बढ़ा इंतजार, फैंस में जबरदस्त उत्साह
Jana Nayagan Update: A सर्टिफिकेट मिलने के बाद बढ़ा क्रेज, एडवांस बुकिंग खुलते ही एक घंटे में बिके हजारों टिकट
आर्थिक तंगी में बेचना पड़ा डिंपल बंगला
सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद राजेंद्र कुमार ने मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड पर समुद्र किनारे बना एक बंगला खरीदा था। उन्होंने इसे अभिनेता भारत भूषण से करीब 60 हजार रुपये में खरीदा और अपनी बेटी के नाम पर इसका नाम ‘डिंपल’ रखा। इस बंगले में आने के बाद उनके करियर ने नई ऊंचाइयां छुईं, इसलिए वह इसे अपना लकी घर मानते थे। लेकिन 1970 के दशक में फिल्मों में उनका दौर कमजोर पड़ने लगा और आर्थिक स्थिति बिगड़ गई।
राजेश खन्ना के लिए भी बना था लकी
राजेंद्र कुमार का यह बंगला बाद में राजेश खन्ना ने खरीद लिया और इसका नाम ‘आशीर्वाद’ रखा। इस घर में रहने के दौरान राजेश खन्ना ने लगातार कई सुपरहिट फिल्में दीं और यह बंगला उनके लिए भी बेहद लकी साबित हुआ। उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी दिन भी इसी बंगले में बिताए। राजेंद्र कुमार की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि सफलता और संघर्ष दोनों जीवन का हिस्सा हैं।
