Asha Bhosle Bandini Song: रोते हुए रिकॉर्ड हुआ ‘बंदिनी’ का गीत, डांट के बाद निखरी आशा भोसले की आवाज
Asha Bhosle Life Story: फिल्म बंदिनी के एक गीत को रिकॉर्ड करते समय आशा भोसले भावुक होकर रो पड़ी थीं। एसडी बर्मन की डांट के बाद उन्होंने अपने दर्द को आवाज में उतारा और एक ही टेक में गाना रिकॉर्ड किया।
- Written By: सोनाली झा
आशा भोसले (फोटो-सोशल मीडिया)
Asha Bhosle Emotional Recording: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले ने अपने करियर में हजारों गाने गाए, लेकिन कुछ किस्से ऐसे हैं जो उनकी महानता और संवेदनशीलता को और गहराई से दिखाते हैं। फिल्म बंदिनी के एक गीत से जुड़ा यह किस्सा आज भी संगीत प्रेमियों को भावुक कर देता है। साल 1963 में रिलीज हुई बंदिनी अपने दौर की क्लासिक फिल्मों में शुमार है।
बंदिनी में नूतन, धर्मेंद्र और अशोक कुमार जैसे कलाकारों ने दमदार अभिनय किया था। फिल्म का संगीत एसडी बर्मन ने तैयार किया था, जिनकी धुनें आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं। रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले ने गाना पूरी तरह सही सुर और लय में गाया, लेकिन एसडी बर्मन को उसमें वह इमोशनल गहराई नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
निजी दर्द ने दी आवाज को असली ताकत
एसडी बर्मन ने नाराज होकर आशा भोसले से कहा कि क्या उन्हें अपने भाई की याद नहीं आती। यह सवाल सीधे उनके दिल को छू गया और माहौल अचानक बदल गया। उस समय आशा भोसले अपने निजी जीवन में कठिन दौर से गुजर रही थीं और परिवार से दूर थीं। भाई की याद आते ही आशा भोसले की आंखों से आंसू बहने लगे। इसी भावुक स्थिति में आशा भोसले ने दोबारा गाना गाया। इस बार आशा भोसले की आवाज में सच्चा दर्द और गहराई थी, जिसने उस गीत को अमर बना दिया।
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एक ही टेक में बना यादगार गीत
बताया जाता है कि आशा भोसले ने यह गाना एक ही टेक में रिकॉर्ड किया था। आशा भोसले की आवाज में जो दर्द और भावनाएं थीं, उन्होंने गीत को दिलों तक पहुंचा दिया। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह गीत उतना ही प्रभावशाली लगता है। आशा भोसले की सबसे बड़ी ताकत उनकी इमोशनल अभिव्यक्ति थी। आशा भोसले ने हर गाने को सिर्फ गाया नहीं, बल्कि उसे जिया। आज भले ही आशा भोसले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाने और उनसे जुड़े ऐसे किस्से हमेशा उन्हें अमर बनाए रखेंगे। आशा भोसले की आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
