रहमान को कम काम मिलने के दावे पर राम गोपाल वर्मा का रिएक्शन, बोले- धर्म से नहीं, हिट से चलता है सिनेमा

Ram Gopal Varma Reaction On AR Rahman: एआर रहमान के कम काम मिलने के दावे पर राम गोपाल वर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री धर्म से नहीं, बल्कि हिट और कमाई से चलती है।
Ram Gopal Varma reaction to the claim that Rahman is getting less work
एआर रहमान और राम गोपाल वर्मा (फोटो- सोशल मीडिया)
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AR Rahman Less Work Claim: मशहूर संगीतकार एआर रहमान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें रिलेटिविटी कम काम मिला है और इसकी एक वजह बदलता माहौल हो सकता है। रहमान के इस बयान के बाद इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनके अनुभव से सहमत नजर आए, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत धारणा बताया। अब इस मुद्दे पर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने खुलकर अपनी राय रखी है।

फिल्म पत्रकार फरीदून शहरयार के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान राम गोपाल वर्मा ने कहा कि वह फिल्म इंडस्ट्री को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखते। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री का मूल उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाना है। वर्मा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री किसी धर्म, जाति या बैकग्राउंड को देखकर काम नहीं करती। जो व्यक्ति या कलाकार बॉक्स ऑफिस पर पैसा कमाकर दे सकता है, इंडस्ट्री उसी के पीछे जाती है।

राम गोपाल वर्मा ने कही ये बात

राम गोपाल वर्मा ने आगे यह भी जोड़ा कि फिल्ममेकर्स उन कलाकारों के साथ काम करना पसंद करते हैं, जो लगातार हिट फिल्में दे रहे हों। उनके अनुसार, इंडस्ट्री का व्यवहार पूरी तरह से बिजनेस मॉडल पर आधारित है, न कि किसी विचारधारा या धार्मिक पहचान पर। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यहां भावनाओं से ज्यादा आंकड़े मायने रखते हैं।

एआर रहमान के निजी अनुभवों को नकारा

हालांकि, राम गोपाल वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह एआर रहमान के निजी अनुभवों को नकार नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि संभव है रहमान ने अपने करियर में कुछ ऐसी परिस्थितियों का सामना किया हो, जिनके बारे में बाकी लोग नहीं जानते। वर्मा के मुताबिक, मैं यह नहीं कह सकता कि रहमान ने क्या झेला है। अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ है, तो उस अनुभव को समझे बिना कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

एआर रहमान ने कही ये बात

गौरतलब है कि इससे पहले एआर रहमान ने बीबीसी एशियन से बातचीत में कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में इंडस्ट्री में पावर शिफ्ट देखने को मिला है। उन्होंने इशारा किया था कि अब फैसले ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो रचनात्मक नहीं हैं, और संभव है कि इस बदलाव में सांप्रदायिक सोच भी एक कारण हो, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा उनके सामने सीधे तौर पर नहीं हुआ।