9 साल की उम्र में टूटा सहारा, संगीत ने दिया नया जीवन, जानें एआर रहमान का संघर्ष भरा सफर
AR Rahman struggle Story: एआर रहमान ने 9 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद संगीत को अपना सहारा बनाया। संघर्ष, मेहनत और जुनून के दम पर एआर रहमान होम स्टूडियो से ऑस्कर मंच तक पहुंचे।
- Written By: सोनाली झा
एआर रहमान (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
AR Rahman Birthday Special Story: संगीत की दुनिया में अगर किसी नाम ने भारतीय सुरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है, तो वह हैं एआर रहमान। छोटे से होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो से लेकर ऑस्कर के मंच तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है। रहमान की कहानी सिर्फ एक संगीतकार की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने हालात से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।
एआर रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ था। उनका असली नाम एएस दिलीप कुमार था। उनके पिता आर.के. शेखर मलयालम फिल्मों के जाने-माने संगीतकार थे, जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही रहमान को पियानो और संगीत की बारीकियां सिखानी शुरू कर दी थीं। लेकिन किस्मत ने जल्द ही कड़ी परीक्षा ली। जब रहमान सिर्फ नौ साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब हो गई और घर की जिम्मेदारियां नन्हे रहमान के कंधों पर आ गईं।
एआर रहमान का संघर्ष
पढ़ाई छोड़कर उन्होंने संगीत को ही अपना सहारा बनाया। पिता के वाद्ययंत्रों को किराए पर देना, स्टूडियो में काम करना और छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई। 15 साल की उम्र में उन्होंने अपने पहले काम से केवल 50 रुपये कमाए, लेकिन यही छोटी सी शुरुआत आगे चलकर बड़ी उपलब्धियों की नींव बनी।
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एआर रहमान ने अपनाया इस्लाम धर्म
युवावस्था में रहमान ने जीवन में बड़ा बदलाव किया और इस्लाम धर्म अपनाते हुए अपना नाम अल्लाह रक्खा रहमान रखा। इसके बाद उन्होंने विज्ञापनों और जिंगल्स के लिए संगीत बनाना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने अपने घर के आंगन में एक छोटा सा होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाया, जहां से उनकी रचनात्मक उड़ान ने रफ्तार पकड़ी। आज उनके नाम दो ऑस्कर, दो ग्रैमी, गोल्डन ग्लोब, कई राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म भूषण जैसे बड़े सम्मान दर्ज हैं।
एआर रहमान का करियर
1992 में मणिरत्नम की फिल्म ‘रोजा’ से एआर रहमान को पहली बड़ी पहचान मिली। फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा और देखते ही देखते वह भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित संगीतकार बन गए। इसके बाद ‘बॉम्बे’, ‘रंगीला’, ‘ताल’, ‘लगान’, ‘रंग दे बसंती’, ‘स्वदेश’ जैसी फिल्मों ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। 2009 में फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के लिए दो ऑस्कर जीतकर रहमान ने इतिहास रच दिया।
