Birthday Special: पांच हजार रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे अनुराग कश्यप, जानें फिर कैसे बदली किस्मत
Anurag Kashyap Birthday: अनुराग कश्यप आज 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनुराग का सपना वैज्ञानिक बनने का था, लेकिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 55 फिल्में देखने के बाद उन्होंने सिनेमा को करियर बना लिया।
- Written By: सोनाली झा
अनुराग कश्यप (फोटो- सोशल मीडिया)
Anurag Kashyap Birthday Special Story: बॉलीवुड के बेहतरीन फिल्ममेकर और अपने अनोखे अंदाज से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाने वाले अनुराग कश्यप का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई का आईना बनाने का काम किया है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान सफर नहीं था।
अनुराग कश्यप का जन्म 10 सितंबर 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। अनुराग कश्यप आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनुराग कश्यप की शुरुआती पढ़ाई देहरादून में हुई। आठ साल की उम्र में वह ग्वालियर पहुंचे। दिलचस्प बात यह है कि बचपन में उनका सपना वैज्ञानिक बनने का था। इसके लिए उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज में एडमिशन लिया।
अनुराग कश्यप का टर्निंग प्वॉइंट
हंसराज कॉलेज में अनुराग कश्यप का सामना थिएटर ग्रुप जन नाट्य मंच से हुआ और उन्होंने नुक्कड़ नाटकों में हिस्सा लेना शुरू किया। अनुराग कश्यप की जिंदगी का टर्निंग प्वॉइंट तब आया, जब उन्हें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने मात्र 10 दिनों में 55 फिल्में देख डालीं। यही वह पल था जब अनुराग कश्यप ने तय कर लिया कि उनका भविष्य सिनेमा से ही जुड़ा होगा।
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अनुराग कश्यप का फिल्मी करियर
साल 1993 में महज 5,000 रुपये लेकर अनुराग कश्यप मुंबई पहुंचे। शुरुआत बेहद कठिन थी, यहां तक कि पैसों की कमी के चलते उन्हें कई रातें सड़कों पर गुजारनी पड़ीं। लेकिन संघर्ष के दिनों में उन्हें पृथ्वी थिएटर में काम करने का मौका मिला, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से जोड़े रखा। अनुराग कश्यप का फिल्मी करियर तब आगे बढ़ा जब एक्टर मनोज बाजपेयी ने उनकी मुलाकात डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा से कराई।
निर्देशन की शुरुआत
अनुराग कश्यप ने फिल्म सत्या की स्क्रिप्ट लिखने में योगदान दिया। यहीं से उन्हें पहचान मिली और इंडस्ट्री में उनकी एंट्री पक्की हो गई। निर्देशन की शुरुआत उन्होंने फिल्म पांच से की, हालांकि सेंसर बोर्ड की पाबंदियों के कारण यह फिल्म रिलीज नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने ब्लैक फ्राइडे बनाई, जो मुंबई बम धमाकों पर आधारित थी और हुसैन जैदी की किताब से प्रेरित थी। इस फिल्म ने उन्हें बतौर गंभीर और साहसी फिल्मकार अलग पहचान दिलाई।
