अनिल शर्मा ने ‘वनवास’ के माध्यम से उजागर की बुजुर्गों की दुर्दशा की कड़वी सच्चाई
गदर 2 जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा, जो बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ मास एंटरटेनमेंट की ताकत को फिर से साबित कर चुके हैं, आराम से एक और सफल व्यावसायिक फिल्म बना सकते थे।
- Written By: सोनाली झा
अनिल शर्मा (सौजन्य- सोशल मीडिया)
मुंबई: गदर 2 जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा, जो बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ मास एंटरटेनमेंट की ताकत को फिर से साबित कर चुके हैं, आराम से एक और सफल व्यावसायिक फिल्म बना सकते थे। लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता चुना। अपनी आगामी फिल्म ‘वनवास’ के माध्यम से, वह एक गहन और संवेदनशील विषय पर प्रकाश डालते हैं कि आधुनिक भारत में बुजुर्गों का परित्याग।
कोविड-19 महामारी के दौरान, जब अधिकतर लोग अपने परिवार के साथ समय बिता रहे थे, अनिल शर्मा ने अपने माता-पिता के साथ बिताए गए क्षणों में एक कड़वी सच्चाई को महसूस किया। हर किसी को अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने का न तो अवसर मिलता है और न ही इच्छाशक्ति। भारत में तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी और उनके साथ हो रहा दुर्व्यवहार या परित्याग एक मूक राष्ट्रीय संकट बनता जा रहा है। खासतौर पर बनारस जैसे शहर, जो अपनी आध्यात्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं, अब ऐसे बुजुर्गों का घर बनते जा रहे हैं जिन्हें उनके बच्चों ने त्याग दिया है।
‘वनवास’ बनारस की इस मार्मिक सच्चाई से प्रेरणा लेकर बनाई गई है। यह फिल्म न केवल एक कहानी सुनाती है बल्कि एक संदेश भी देती है। बनारस जैसे स्थान का चयन, जिसकी धार्मिक और सांस्कृतिक गहराई है, इस मुद्दे की गंभीरता को और अधिक बढ़ाता है। यह स्थान एक प्रतीक बन जाता है उस समाज का, जो अपने बुजुर्गों का सम्मान करना भूल गया है।
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फिल्म उन बच्चों की मानसिकता को उजागर करती है, जो अपने माता-पिता को बोझ समझते हैं, खासकर जब वे बुढ़ापे में बीमारियों या शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे होते हैं। पारिवारिक झगड़े और आर्थिक विवाद भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। अनिल शर्मा इन छिपी हुई सच्चाइयों को समाज के सामने लाकर आत्मनिरीक्षण की मांग करते हैं।
यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि दिलों को छूने और समाज की सोच को झकझोरने के लिए बनाई गई है। इस फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपने दर्शकों से यह प्रश्न करना है कि वे अपने रिश्तों को कैसे देखते हैं और उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं। अगर गदर 2 ने देशभक्ति और जज़्बे का जश्न मनाया, तो ‘वनवास’ मानवता और जिम्मेदारी की बात करता है।
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