अमिताभ बच्चन (फोटो- सोशल मीडिया)
Amitabh Bachchan Untold Story: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अक्सर सोशल मीडिया और अपने ब्लॉग के जरिए सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक ब्लॉग में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने न सिर्फ उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया, बल्कि भारत को लेकर विदेशों में बनी सोच पर भी सवाल खड़े कर दिए। यह पूरा मामला उनके उस ट्वीट के बाद चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत पर देश को बधाई दी थी।
दरअसल, शुक्रवार को अमिताभ बच्चन ने एक्स पर भारत की अंडर-19 पुरुष क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ जीत के लिए बधाई देते हुए लिखा था कि भारत आज हर क्षेत्र में अव्वल है और हम तीसरे दर्जे के नहीं, बल्कि विश्व में प्रथम हैं। इस ट्वीट में इस्तेमाल किए गए ‘थर्ड रेट’ शब्दों पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद बिग बी ने अपने ब्लॉग के जरिए इस बयान के पीछे की वजह बताई।
अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में बताया कि उन्हें एक बार एक विदेशी देश में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में आमंत्रित किया गया था। यात्रा के दौरान उन्होंने फ्लाइट में उस देश का अखबार देखा, जिसमें उनकी एक फिल्म का पोस्टर छपा हुआ था। भाषा समझ में न आने पर उन्होंने एयर होस्टेस से पूछा कि उसमें क्या लिखा है। उन्हें बताया गया कि अखबार में लिखा है कि एक भारतीय फिल्म का अभिनेता उस देश में आ रहा है। यह देखकर अमिताभ हैरान हुए कि विदेशों में भी उनकी फिल्मों को इतनी पहचान मिल रही है।
लैंडिंग के बाद उन्हें इस लोकप्रियता की वजह समझ में आई। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी। हालात ऐसे हो गए कि पुलिस को दखल देना पड़ा और सुरक्षा के बीच उन्हें होटल पहुंचाया गया। बिग बी के मुताबिक, यह उनकी जिंदगी का पहला मौका था जब उनका इमिग्रेशन होटल के अंदर पूरा कराया गया। हालांकि, इस शानदार स्वागत के बावजूद उन्हें एक सीनियर स्थानीय पत्रकार की टिप्पणी ने गहरा झटका दिया। उस पत्रकार ने लिखा कि तीसरी दुनिया के देश के इस थर्ड रेट एक्टर को इतना अटेंशन क्यों दिया जा रहा है?
अमिताभ बच्चन ने स्वीकार किया कि थर्ड रेट एक्टर कहे जाने को वह व्यक्तिगत आलोचना मानकर सह सकते हैं, लेकिन भारत को ‘तीसरी दुनिया का देश’ कहे जाने से उन्हें गहरी पीड़ा हुई। अपने ब्लॉग के अंत में अमिताभ बच्चन ने साफ किया कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। वह सिर्फ यह बताना चाहते थे कि भारत आज खेल, कला और संस्कृति के हर क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।