कौन हैं TVK के VS बाबू? जिन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हराया, कभी उनकी ही पार्टी के थे खास
MK Stalin Defeated by VS Babu: वीएस बाबू लगभग दो दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं। वे 2006 से 2011 तक विधायक रह चुके हैं। एमके स्टालिन के बेहद करीबी रहे बाबू ने 7 फरवरी को डीएमके छोड़ा था।
- Written By: मनोज आर्या
थलापति विजय के साथ वी.एस बाबू, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Who is VS Babu, Defeated MK Stalin: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। पहली बार चुनावी लड़ाई में उतरी थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने इतिहास रच दिया है। इस चुनाव में कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट कोलाथुर में मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन की करारी हार हुई है। स्टालिन को उनकी ही पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता और टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू ने करीब 8000 से ज्यादा वोटों से हराने में सफल रहे।
75 वर्षीय वीएस बाबू तमिलनाडू की राजनीति के एक मंझे हुए नेता माने जाते हैं, जिनकी राजनीतिक पकड़ कोलाथुर इलाके में काफी मजबूत मानी जाती है। साल 2006 में डीएमके के टिकट पर पुरासवाल्कम सीट से उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी। उस चुनाव में उन्होंने में AIADMK उम्मीदवार को 90 से अधिक वोटों से हराया था।
दो दशकों का राजनीतिक अनुभव
वीएस बाबू लगभग दो दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं। वे 2006 से 2011 तक विधायक के रूप में लोगों की सेवा कर चुके हैं। एमके स्टालिन के बेहद करीबी रहे बाबू ने 7 फरवरी को डीएमके छोड़कर एक्टर विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हुए थे। 2026 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वीएस बाबू के पास 3.7 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
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यह पहली बार है जब डीएमके के गठन के बाद पार्टी के अध्यक्ष एमके स्टालिन और महासचिव दुरईमुरुगन दोनों ही एक साथ विधानसभा चुनाव हाए गए हैं। कोलाथुर सीट, जिसने स्टालिन को 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार जीत दिलाई थी। हालांकि, इस बार यह सीट डीएमके के हाथ से निकल गई और पार्टी के अध्यक्ष को हार का माननी पड़ी।
कोलाथुर में दिग्गजों के बीच मुकाबला
कोथालुर सीट पर इस चुनाव में चार दिग्गजों के बीच लड़ाई थी। जहां चतुष्कोणीय मुकाबले ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया था।
- वी.एस बाबू (टीवीकेः
- एमके स्टालिन ( डीएमके)
- पी. संथाना कृष्णन (एआईडीएमके)
- सौंदारा पांडियन लूथर सेठ (NTK)
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दक्षिण भारत की राजनीति में नया युग
विजय थलापति की पार्टी TVK के बढ़ते क्रेज और वीएस बाबू की स्थानीय पकड़ ने मिलकर स्टालिन के ‘अभेद्य किले’ को ढहा दिया। स्टालिन की यह हार न सिर्फ DMK के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि साउथ इंडिया की राजनीति में एक नए युग के उदय का संकेत भी दे रही है।
