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Thousand Lights Assembly Profile Update: चेन्नई के मध्य में स्थित थाउजेंड लाइट्स महज एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता का एक बड़ा पावर सेंटर रहा है। यह इलाका अपने मिश्रित आवासीय-व्यावसायिक चरित्र और अल्पसंख्यक आबादी की सघनता के लिए जाना जाता है।
आगामी 23 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के लिए यहां की सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अन्ना सलाई के किनारे बसे इस क्षेत्र में एक तरफ पुरानी रिहायशी बस्तियां हैं, तो दूसरी तरफ आधुनिक अस्पताल और दफ्तर, जो इसे एक ‘गवर्नेंस-इंटेंसिव’ सीट बनाते हैं।
इस सीट से जुड़ा है ‘कलैग्नार’ परिवार का गहरा नाता
थाउजेंड लाइट्स का राजनीतिक महत्व इस बात से समझाजा सकता है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन यहां से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं। इतना ही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि जब गोपालपुरम में रहते थे, तो वे इसी क्षेत्र में अपना वोट डालते थे। डीएमके के लिए यह सीट हमेशा से उनके नेतृत्व की साख का प्रतीक रही है। 2021 के चुनावों में भी डीएमके के एझिलन एन. ने 52.9% वोट हासिल कर भाजपा की हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार खुशबू सुंदर को 32,462 वोटों के भारी अंतर से हराया था।
भले ही यह एक ‘हाई-वैल्यू’ शहरी सीट हो, लेकिन यहां की नागरिक समस्याएं काफी गंभीर हैं। अन्ना सलाई के पास होने के बावजूद, संकरी आंतरिक सड़कें, पार्किंग की भारी कमी और भारी ट्रैफिक जाम यहां के निवासियों और व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत हैं। इसके अलावा, बारिश के दौरान जलजमाव और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज की पुरानी व्यवस्था ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति और कचरा प्रबंधन में कमियां ऐसे मुद्दे हैं जो इस बार मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
आगामी चुनावों में यहां मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। कमल हासन की पार्टी एमएनएम, जिसने 2021 में यहां करीब 11,791 वोट हासिल किए थे, इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है और उसने डीएमके गठबंधन को बिना शर्त समर्थन दिया है।, इससे डीएमके की स्थिति मजबूत हुई है। हालांकि, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है, जो युवाओं के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। दूसरी ओर, भाजपा इस बार एनडीए गठबंधन के तहत तमिलनाडु में 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें चेन्नई की मायलापुर जैसी शहरी सीटों पर उनका खास ध्यान है।
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यहां का मतदाता काफी जागरूक है और वह प्रशासन की कार्यक्षमता और समावेशी नेतृत्व को इनाम देता है। मुस्लिम आबादी की अच्छी-खासी संख्या होने के कारण, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं यहां जीत की कुंजी मानी जाती हैं। मस्जिद कमेटियां, व्यापारियों के संघ और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन चुनावी गोलबंदी में बड़ी भूमिका निभाते हैं। 4 मई 2026 को जब नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि ‘थाउजेंड लाइट्स’ की जनता ने विकास के दावों पर भरोसा किया है या विरासत के नाम पर वोट दिया है।