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Assam Assembly Election 2026: असम के ऊपरी हिस्से में स्थित सिबसागर महज एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह असम के गौरवशाली इतिहास और पहचान का धड़कता हुआ दिल है। ब्रह्मपुत्र घाटी के उपजाऊ मैदानों में बसा यह इलाका कभी शक्तिशाली अहोम साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था, जिसके 600 साल पुराने स्मारक और विशाल तालाब आज भी इसकी भव्यता की कहानी सुनाते हैं।
इस समय सिबसागर की फिजाओं में महज इतिहास की महक नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव की तपिश भी महसूस की जा रही है। चाय के बागानों और तेल भंडारों वाले इस क्षेत्र में इस बार जो राजनीतिक खिचड़ी पक रही है उसने दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक के दिग्गजों की नींद उड़ा रखी है।
सिबसागर का राजनीतिक इतिहास उतना ही गहरा है जितना यहां का सांस्कृतिक महत्व। 1951 में अपनी स्थापना के बाद से इस सीट ने 15 विधानसभा चुनाव देखे हैं, जहां कांग्रेस का लंबे समय तक दबदबा रहा है। कांग्रेस ने यहां आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पांच बार अपना परचम लहराया है।
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी यहां अब तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। 2021 के चुनावों ने यहां एक नया मोड़ लिया जब जेल में रहते हुए ‘रायजोर दल’ के संस्थापक अखिल गोगोई ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाजपा की सुरभि राजकोंवर को करीब 11,875 वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था।
आगामी 2026 के चुनावों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि रायजोर दल और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है। एक समझौते के तहत रायजोर दल असम में 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगा, जिसमें सिबसागर की उनकी प्रमुख सीट भी शामिल है।
इस गठबंधन ने भाजपा-AGP गठबंधन के लिए राह और मुश्किल कर दी है, क्योंकि विपक्षी वोटों का बंटवारा रुकने से समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। सिबसागर एक सामान्य श्रेणी की सीट है जहां मतदाताओं का रुझान हमेशा से ही क्षेत्रीय अस्मिता और विकास के प्रति रहा है। यहां का मतदाता जागरूक है, जिसका प्रमाण यहां का उच्च मतदान प्रतिशत (2016 में 84.72%) है।
सिबसागर की अर्थव्यवस्था तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है- चाय, तेल और पर्यटन। यहां के ग्रामीण मतदाता, जो कुल आबादी का लगभग 74.23% हैं, मुख्य रूप से धान की खेती, सरसों और रेशम उत्पादन पर निर्भर हैं। ओआईएल के ऑपरेशंस यहां रोजगार का एक बड़ा जरिया हैं।
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एक आम नागरिक के लिए यहां चुनावी मुद्दे केवल पार्टी के नाम तक सीमित नहीं हैं; चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी, तेल क्षेत्रों से मिलने वाले स्थानीय लाभ और अहोम स्मारकों का संरक्षण यहां की मुख्य चिंताएं हैं। मुस्लिम मतदाताओं का लगभग 17% और अनुसूचित जाति (SC) का 10.27% हिस्सा चुनावी नतीजों को तय करने में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाता है।
भले ही भाजपा ने विधानसभा में यहां कभी जीत दर्ज न की हो, लेकिन लोकसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। हालांकि, 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस ने सिबसागर सेगमेंट में भाजपा पर 18,748 वोटों की एक बड़ी बढ़त हासिल कर अपनी वापसी का संकेत दे दिया है।
सिबसागर की मतदाता सूची भी लगातार बढ़ रही है, जो 2021 में 1.49 लाख से बढ़कर 2026 के चुनावों के लिए लगभग 2.09 लाख तक पहुंच गई है। बढ़ते हुए युवा मतदाता और नए गठबंधन के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा इस बार कोई ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेल पाती है या सिबसागर का यह किला फिर से उसके हाथ से निकल जाता है।