फलोदी सट्टा बाजार या एग्जिट पोल? दिल्ली में सटीक साबित होगा किसका अनुमान, यहां देखिए लेटेस्ट रिपोर्ट
फलोदी सट्टा बाजार के पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सीटों की संख्या पिछली बार के मुकाबले कम हो सकती है, हालांकि केजरीवाल सरकार बनाएंगे।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
नई दिल्ली; दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हो चुका है। चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे। अब एग्ज एग्जिट पोल भी सामने आ गए हैं। इक्का दुक्का को छोड़ दें तो लगभग सभी एजेंसियों के सर्वे में बीजेपी आगे दिखाई दे रही है। इस बीच लोगों को यह जानने में दिलचस्पी है कि एग्जिट पोल्स सट्टा बाजार के अनुमान के आंकड़ों के कितने करीब या दूर हैं।
सट्टा बाजार के पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सीटों की संख्या पिछली बार के मुकाबले कम हो सकती है, हालांकि केजरीवाल सरकार बनाएंगे। राजस्थान के फलौदी सट्टा बाजार ने अनुमान लगाया है कि ‘आप’ 38-40 सीटें, भाजपा 30-32 और कांग्रेस 0-1 सीटें जीतेगी। सरकार बनाने के लिए 36 सीटों की जरूरत है।
सट्टा बाजार में AAP, एग्जिट पोल्स में BJP
इस लिहाज से देखा जाए तो एग्जिट पोल्स फलोदी सट्टा बाजार के अनुमान से उलट दिख रहे हैं। क्योंकि सट्टा बाजार के अनुमान के मुताबिक आदमी पार्टी को नुकसान ज़रूर हो रहा है लेकिन दिल्ली में उसकी बहुमत के साथ सरकार बनती दिखाई दे रही है। लेकिन एग्जिट पोल्स में भाजपा आगे दिखाई दे रही है। सभी एजेंसियों के सर्वे का औसत देखें तो बीजेपी 35 से 40 सीटों के बीच दिखाई दे रही है। जबकि ‘आप’ को 27 से 32 सीटें मिलती हुई ही दिखाई दे रही हैं।
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2020 में क्या था एग्जिट पोल का अनुमान?
2020 में दिल्ली की जनता ने 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान किया था। चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल में लगभग सभी एजेंसियों ने आप को बहुमत मिलता दिखाया था। एक्सिस माई इंडिया ने आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 59-68 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था। जन की बात और न्यूज एक्स नेता ने आप को 55 सीटें दी थीं। वहीं टाइम्स नाउ ने केजरीवाल की पार्टी को 47 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था।
2020 के नतीजों का हाल-ओ-हवाल
हालांकि, जब चुनाव नतीजे आए तो आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटें जीतीं। लेकिन पार्टी के वोट शेयर में 0.73% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। वहीं, बीजेपी के वोट प्रतिशत में 6.21% का उछाल आया। हालांकि, इसके बावजूद बीजेपी को सिर्फ 8 सीटें मिलीं। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 4.26% रहा। पार्टी ने 2013 और 2015 के बाद एक बार फिर वोट प्रतिशत में गिरावट दर्ज की। 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।
2015 में भी ग़लत हुआ अनुमान
2015 में, अधिकांश एग्जिट पोल ने AAP को स्पष्ट बहुमत मिलने की भविष्यवाणी की थी। हालांकि, किसी ने भी अरविंद केजरीवाल की भारी जीत की भविष्यवाणी नहीं की थी। छह प्रमुख एग्जिट पोल के औसत ने भविष्यवाणी की थी कि AAP लगभग 45 सीटें जीतेगी, जबकि भाजपा को 24 सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन चुनाव परिणामों ने उम्मीदों को तोड़ दिया। AAP ने 67 सीटें जीतीं। भाजपा को केवल तीन सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस शून्य पर सिमट गई थी।
एग्जिट पोल कितने सटीक होते हैं?
एग्जिट पोल मतदाताओं के मतदान केंद्रों से निकलने के तुरंत बाद किए जाने वाले सर्वेक्षण होते हैं। पोलस्टर मतदाताओं के एक नमूने से पूछते हैं कि उन्होंने किसे वोट दिया, और उनके जवाब चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं। ओपिनियन पोल के विपरीत, जो मतदान से पहले मतदाता की पसंद का अनुमान लगाते हैं।
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एग्जिट पोल वास्तविक समय में वास्तविक मतदान व्यवहार को पकड़ने का प्रयास करते हैं। एग्जिट पोल की विश्वसनीयता कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें मतदाताओं की ईमानदारी, नमूने का आकार और त्रुटि का मार्जिन शामिल है। हालाँकि वे अक्सर चुनावी रुझानों का संकेत देते हैं, लेकिन वे अतीत में गलत भी रहे हैं।
