
बिहार के सीएम नीतीश कुमार व पीएम नरेन्द्र मोदी (सौजन्य- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। चुनाव परिणाम से भले ही यह तय है कि केन्द्र में एक बार फिर से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार बनने जा रही है। लेकिन इस बार बीजेपी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर रहना होगा। ऐसे में सहयोगी दल भी हालात का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। जिसके रुझान आने भी शुरू हो गए हैं।
2024 लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र में एक बार फिर से मोदी सरकार बनने जा रही है। जानकारी के मुताबिक 9 जून को नरेन्द्र मोदी तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेगें। हालांकि 2014 और 2019 के मुकाबले बीजेपी इस बार कमजोर हुई है। अकेले के दम पर बहुमत नहीं हासिल कर सकी है। ऐसे में उसे टीडीपी और जेडीयू पर पूरी तरह निर्भर रहना होगा साथ ही उनका खयाल भी रखना होगा।
इस बार सरकार चलाने के लिए बीजेपी को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जिसकी शुरुआत सरकार के गठन और शपथ ग्रहण के पहले ही हो चुकी है। नीतीश कुमार ने भले ही सीधे तौर पर पीएम मोदी के सामने कोई मांग नहीं रखी है लेकिन जेडीयू नेताओं यह काम शुरू कर दिया है।
जनता दल यूनाइटेड ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और अग्निवीर योजना जैसे मुद्दों पर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने ताज़ा बयान में कहा है कि अग्निवीर योजना को लेकर आम लोगों में गुस्सा है। जनता ने इसे लेकर जो असहमति दिखाई है उसपर विचार होना चाहिए। इसके साथ ही साथ उन्होंने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की भी बात कही है।
जेडीयू साल 2005 से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करती आई है। वहीं अब एक बार फिर उसने अपनी मांग को दोहराया है। जदयू सांसद आलोक कुमार ने कहा है कि ये हमारी हमेशा से ही मांग रही है और हम ये कायम रखेंगे। इसके साथ ही बिहार का विकास संभव है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि अब तक 11 राज्यों को स्पेशल स्टेटस दिया जा चुका है। जिसमें असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इसी को आधार बनाकर बिहार को भी विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग उठती रही है। माना ये जा रहा है कि इस बार सरकार को यह मांग पूरी करनी पड़ेगी।






