पुडुचेरी चुनाव: एक वकील जो अपनी शर्तों पर बना सियासत का सुल्तान, जानिए पुडुचेरी के ‘मक्कल मुधलवर’ की कहानी
N Rangaswamy Biography: एन. रंगास्वामी की सादगी और जनता के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें पुडुचेरी का सबसे ताकतवर नेता बनाया है। कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने का उनका फैसला ऐतिहासिक साबित हुआ।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
एन. रंगास्वामी, फोटो- सोशल मीडिया
Puducherry Assembly Election 2026: पुडुचेरी की गलियों में एक ऐसा राजनेता घूमता है, जिसकी सादगी और मृदुभाषी व्यवहार ने उसे जनता का सबसे चहेता चेहरा बना दिया है। एन. रंगास्वामी, जो वर्तमान में पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनका जीवन एक साधारण व्यक्ति के असाधारण संकल्प की कहानी है।
अक्सर राजनेताओं को भारी-भरकम सुरक्षा और दिखावे के लिए जाना जाता है, लेकिन रंगास्वामी की पहचान “जूनियर कामराज” के रूप में होती है, जो अपनी सादगी के लिए मशहूर हैं। पुडुचेरी जैसे छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से सक्रिय केंद्र शासित प्रदेश में, उन्होंने अपनी एक ऐसी स्वतंत्र पहचान बनाई है जो राष्ट्रीय पार्टियों के वर्चस्व को भी चुनौती देती है। एक आम नागरिक की भाषा में रंगास्वामी की राजनीति का मतलब है- सुलभ प्रशासन और सीधे तौर पर जनता की समस्याओं का समाधान।
साधारण परिवार से वकालत और पुडुचेरी के सीएम तक का सफर
एन. रंगास्वामी का जन्म 4 अगस्त 1950 को पुडुचेरी के एक साधारण और मेहनतकश परिवार में हुआ था। उनके पिता नतेसन कृष्णास्वामी और माता पांचाली ने उन्हें उन मूल्यों के साथ बड़ा किया, जहाँ जनसेवा सर्वोपरि थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद टैगोर आर्ट्स कॉलेज से बी.कॉम और डॉ. अंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की।
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राजनीति में उनका प्रवेश 1990 के दशक में हुआ, जब उन्होंने पहली बार थत्तांचवडी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा। हालांकि पहले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 1991 में अपनी पहली जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2001 में पहली बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचे।
कांग्रेस से नाता तोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाने का फैसला
रंगास्वामी ने अपने राजनीतिक जीवन का एक लंबा हिस्सा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बिताया, जहां वे कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे। लेकिन 2008 में पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों और आंतरिक कलह के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अंततः 2011 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया।
यह उनके जीवन का सबसे जोखिम भरा मोड़ था, जब उन्होंने ‘ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस’ (AINRC) नाम से अपनी क्षेत्रीय पार्टी की नींव रखी। उनके व्यक्तित्व का जादू ऐसा था कि अपनी पार्टी बनाने के महज तीन महीने के भीतर ही उन्होंने विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल किया और दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि जनता पार्टी से ज्यादा रंगास्वामी के चेहरे और उनके काम पर भरोसा करती है।
गरीबों को पक्का घर और मुफ्त शिक्षा
एन. रंगास्वामी को पुडुचेरी में “मक्कल मुधलवर” यानी ‘जनता का मुख्यमंत्री’ कहा जाता है, और इसके पीछे उनकी जन-कल्याणकारी नीतियां हैं। उन्होंने “पेरुंथलाईवर कामराजार आवास योजना” शुरू की, जिसका उद्देश्य पुडुचेरी को झोपड़ी मुक्त बनाना और गरीबों को पक्के घर के लिए सब्सिडी देना है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता; उन्होंने सरकारी स्कूलों में “राजीव गांधी ब्रेकफास्ट स्कीम” के तहत बच्चों को सुबह का नाश्ता और दूध देने की शुरुआत की।
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इसके अलावा, पेशेवर कॉलेजों में पढ़ने वाले गरीब छात्रों की ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए “कामराज शिक्षा सहायता योजना” लागू की गई। इन योजनाओं ने सीधे तौर पर निचले तबके के लोगों के जीवन स्तर को सुधारा है और उन्हें सशक्त बनाया है।
रंगास्वामी आज भी हैं बेताज बादशाह?
2021 के विधानसभा चुनावों में रंगास्वामी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता का परिचय दिया और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन कर चौथी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 75 वर्ष की आयु में भी वे पुडुचेरी की राजनीति के सबसे सक्रिय और शक्तिशाली केंद्र बने हुए हैं।
2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 37.25 करोड़ रुपये है, लेकिन उनका रहन-सहन आज भी एक आम आदमी जैसा ही है। वे ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए शासन में एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। रंगास्वामी का राजनीतिक सफर यह सिखाता है कि अगर कोई नेता अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और ईमानदारी से सेवा करे, तो वह किसी भी राजनीतिक तूफान का सामना कर सकता है।
