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Mannadipet Assembly Seat Profile: पुडुचेरी की राजनीति में मन्नाडिपेट विधानसभा क्षेत्र का अपना एक खास महत्व रहा है। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के लिए अब सियासी पारा चढ़ने लगा है। पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों में से यह सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है और पांडिचेरी जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
लगभग 39 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में मनालीपपेट, चेट्टीपेट और सुथुकेनी जैसे इलाके शामिल हैं। मन्नाडिपेट की जनता हमेशा से लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती आई है, जिसका अंदाजा यहां के पिछले मतदान प्रतिशत से लगाया जा सकता है।
इस निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। साल 2021 के चुनावों में यहां एक बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जब भारतीय जनता पार्टी के ए. नमशिवायम ने जीत का परचम लहराया था। उन्होंने डीएमके के ए. कृष्णन को 2,750 वोटों के अंतर से हराया था। उस समय भाजपा को यहां करीब 52.61 प्रतिशत वोट मिले थे।
हालांकि, इससे पहले 2011 और 2016 के चुनावों में यहां एआईएनआरसी का दबदबा रहा था। यह देखना रोमांचक होगा कि क्या भाजपा अपनी पिछली जीत की लय को बरकरार रख पाती है या फिर क्षेत्रीय दल अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में कामयाब होते हैं। मतदाताओं के मन में इस बार विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर कई सवाल हैं।
सत्ताधारी दल के लिए मन्नाडिपेट की जंग इस बार आसान नहीं मानी जा रही है। 2021 में मिली जीत का अंतर लगभग 9.54 प्रतिशत था, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2016 में तो जीत का अंतर महज 419 वोट ही था। आंकड़ों के इस खेल के बीच, आम मतदाता अब केवल पार्टी का चेहरा नहीं, बल्कि काम की रिपोर्ट देख रहा है।
निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कट्टरी, कुप्पम और वदनूर जैसे ग्रामीण इलाकों के लोग खेती और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विधायक के तौर पर नमशिवायम के पिछले कार्यकाल का मूल्यांकन ही इस बार के चुनावी नतीजों की बुनियाद बनेगा।
मन्नाडिपेट के चुनावी आंकड़ों का सबसे दिलचस्प पहलू यहां की महिला मतदाता हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार की गई मतदाता सूची के अनुसार, यहां कुल 31,063 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें पुरुषों की संख्या 14,600 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 16,460 तक पहुंच गई है। यहां का लिंगानुपात 1127 है, जो स्पष्ट करता है कि जीत का रास्ता महिलाओं के समर्थन से ही होकर गुजरेगा।
पिछले कई चुनावों से महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के मुकाबले ज्यादा प्रभावी रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे सबसे बड़े चुनावी हथियार बन गए हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में 3 मतदाता तीसरे लिंग के भी पंजीकृत हैं, जो लोकतंत्र की समावेशी तस्वीर पेश करते हैं।
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मन्नाडिपेट में चुनावी प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी। इसके बाद, करीब एक महीने के लंबे इंतजार के बाद 4 मई 2026 को मतगणना की जाएगी और नतीजे घोषित होंगे। पिछली बार यहां 87.78 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो यहां के लोगों की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है। इस बार भी प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने उम्मीद जताई है कि लोग भारी संख्या में अपने घरों से निकलकर मतदान करेंगे।