मालदा के सरकारी दफ्तर में नौ घंटे तक बंधक बने रहे 7 अधिकारी, वोटर लिस्ट से नाम हटने पर मचाया तांडव
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट से नाम कटने पर भड़की भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। चुनाव आयोग ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
मालदा के सरकारी दफ्तर के सामने बवाल, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal Malda Violence: मालदा कालियाचक क्षेत्र के एक सरकारी कार्यालय में सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने बंधक बना लिया। इन सात अधिकारियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्हें करीब नौ घंटे तक एक कमरे में कैद रहना पड़ा।
इस पूरे बवाल की जड़ में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत उनके नाम साजिश के तहत हटा दिए गए हैं, जबकि उन्होंने सभी जरूरी कागजात जमा किए थे। मालदा के हरिश्चंद्रपुर और कालियाचक जैसे इलाकों में सुबह से ही लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध जताने के लिए टायर जलाकर रास्ता जाम कर दिया। नेशनल हाईवे-12 पर तो प्रदर्शनकारियों ने फर्नीचर और कांच की बोतलें तक रख दीं, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। कुछ लोग तो सड़क पर ही खाना बनाते हुए नजर आए और उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे वहां से नहीं हटेंगे।
आधी रात को मालदा पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
शाम के समय जब भीड़ ने बीडीओ कार्यालय को घेर लिया, तो अंदर मौजूद न्यायिक अधिकारियों की जान पर बन आई। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भीड़ काफी उग्र थी और पथराव भी कर रही थी। अधिकारियों को सुरक्षित निकालने के लिए जिला पुलिस के आला अधिकारियों को भारी बल के साथ मोर्चा संभालना पड़ा। बुधवार की रात बीतने के बाद, गुरुवार की सुबह तड़के पुलिस किसी तरह इन अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफल रही।
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निर्वाचन आयोग ने लिया संज्ञान
हालांकि, बचाव कार्य के दौरान भी भीड़ ने अधिकारियों के काफिले पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से इस पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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सियासी गलियारों में छिड़ी जुबानी जंग
23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और भी गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुकांत मजूमदार ने इस दुर्व्यवहार के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों को जिम्मेदार ठहराया है। मजूमदार का कहना है कि सत्ताधारी दल चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं में लगातार बाधा डाल रहा है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव कुणाल घोष ने पलटवार करते हुए कहा कि अधिकारियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस हंगामे के पीछे बीजेपी समर्थित कुछ अन्य पार्टियां हो सकती हैं।
