बंगाल चुनाव के बीच ममता के करीबी पुलिस अफसर के घर ED का छापा, रंगदारी और सिंडिकेट रैकेट से जुड़े हैं तार
Kolkata ED Raid: बंगाल चुनाव के बीच ईडी ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है, जो रंगदारी, सिंडिकेट रैकेट और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों से जुड़ी है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास, फोटो- सोशल मीडिया
Kolkata ED Raid Shantanu Sinha Biswas: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच रविवार यानी 19 अप्रैल को कोलकाता में ईडी ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास और एक कारोबारी जॉय कामदार के ठिकानों पर सुबह-सुबह छापेमारी शुरू की।
शांतनु सिन्हा बिस्वास को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है, जिसके कारण इस कार्रवाई ने राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है। यह छापेमारी मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और शहर में सक्रिय सिंडिकेट रैकेट की जांच के सिलसिले में की जा रही है।
चुनावी सरगर्मी के बीच पुलिस महकमे में हलचल
रविवार सुबह करीब 6:00 से 6:30 बजे के बीच ईडी की टीमों ने एक साथ तीन परिसरों पर दबिश दी। इनमें दो परिसर डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के हैं और एक परिसर ‘सन एंटरप्राइज’ के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार का है। ईडी की टीम दक्षिण कोलकाता के बालीगंज स्थित फर्न रोड पर अधिकारी के फ्लैट पर पहुंची, जबकि जॉय कामदार के बेहाला स्थित आवास पर भी तलाशी ली गई। शांतनु सिन्हा बिस्वास लंबे समय तक कालीघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी रहे हैं, जो मुख्यमंत्री का निवास क्षेत्र भी है। इस अचानक हुई कार्रवाई से पुलिस विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
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रंगदारी और ‘सोनापप्पू’ सिंडिकेट से जुड़े तार
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की जा रही है। ईडी को शक है कि डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास शहर में सक्रिय रंगदारी और सिंडिकेट रैकेट में कथित तौर पर शामिल थे।
एजेंसी का आरोप है कि ‘सोनापप्पू’ जैसे अपराधियों द्वारा वसूली के जरिए जुटाए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा अधिकारी तक पहुंचता था। कालीघाट थाने में उनके लंबे कार्यकाल के दौरान हुए वित्तीय लेन-देन और सिंडिकेट गतिविधियों की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।
ईडी ने पहले भी किया है तलब
यह पहली बार नहीं है जब शांतनु सिन्हा बिस्वास जांच एजेंसियों के रडार पर आए हैं। इससे पहले उन्हें कोयला तस्करी मामले के सिलसिले में ईडी ने 6 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में पेश होने के लिए तलब किया था। जांच अधिकारी इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या इन घोटालों का पैसा चुनावी गतिविधियों या अन्य अवैध माध्यमों में इस्तेमाल किया गया है। अधिकारी से उनके आवास पर ही पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे मामले में अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
राजनीतिक संदर्भ और अन्य छापेमारी
बंगाल में चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की यह सक्रियता विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच विवाद का विषय बनी हुई है। इससे पहले पिछले शनिवार को भी ईडी ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और प्रसन्न कुमार रॉय के ठिकानों पर एसएससी भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में छापेमारी की थी।
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इसके साथ ही, आयकर विभाग ने भी हाल ही में टीएमसी विधायक देबाशीष कुमार और ममता बनर्जी के प्रस्तावक मिराज शाह के यहां दबिश दी थी। तृणमूल कांग्रेस इन कार्रवाइयों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दे रही है, जबकि एजेंसियां इन्हें चल रही भ्रष्टाचार की जांच का हिस्सा बता रही हैं।
