बंगाल में बड़ा सियासी उलटफेर होगा, ममता के गढ़ में खिलेगा कमल; हिमंता बिस्वा सरमा ने ठोका दावा
West Bengal Election 2026: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष को घेरा है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
हिमंता बिस्वा सरमा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Himanta Biswa Sarma on Bengal Election: पश्चिम बंगाल की चुनावी रणभूमि में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता हिमंता बिस्वा सरमा की भविष्यवाणी ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
पश्चिम बर्धमान के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ भाजपा की जीत की बात कही, उसने मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है। उनके अनुसार, इस बार बंगाल की जनता एक बड़े और नए बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के मतदाता भी अपने भविष्य का फैसला करने के लिए कमर कस चुके हैं।
बंगाल में भाजपा की पूर्ण जीत का बड़ा दावा
हिमंता बिस्वा सरमा सोमवार को गौरबाजार में अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने पहुंचे थे। वहां मीडिया से खास बातचीत करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार बंगाल के चुनावी नतीजे पूरी तरह भाजपा के पक्ष में रहने वाले हैं।
उनका मानना है कि अब राज्य में परिवर्तन की एक मजबूत लहर चल रही है और भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने जा रही है। उन्होंने अपनी जीत की संभावनाओं को 100 प्रतिशत निश्चित बताया है, जो यह दर्शाता है कि भाजपा इस बार रणनीति में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। मुख्यमंत्री सरमा का यह अटूट विश्वास न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने वाला है, बल्कि विपक्षी खेमे को भी एक बड़ी चुनौती दे रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
ग्लैमर की दुनिया छोड़ संसद तक कैसे पहुंचीं सायोनी घोष, विवादों के बीच भी कैसे बढ़ता रहा कद?
एक्टिंग से संसद की दहलीज तक, कौन हैं टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का बड़ा चेहरा बनने वाली लॉकेट चटर्जी?
तमिलनाडु के चुनावी रण में आज थमने वाला है शोर, 5.7 करोड़ वोटर्स करेंगे 4023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला
पीएम मोदी के झालमुड़ी स्वाद ने कैसे बिगाड़ा हेमंत सोरेन का खेला? बंगाल में छिड़ गया नया सियासी संग्राम
दो चरणों वाला चुनाव बनेगा नया इतिहास
इस बार पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव कई मायनों में अलग और ऐतिहासिक होने जा रहा है। राज्य के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो साल 2001 के बाद से ज्यादातर चुनाव कई चरणों में ही संपन्न हुए हैं। साल 2021 का पिछला चुनाव तो आठ चरणों की लंबी प्रक्रिया के बाद पूरा हुआ था। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने केवल दो चरणों में ही मतदान कराने का एक साहसिक फैसला लिया है।
पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जिसमें 16 जिलों की 152 सीटों पर किस्मत आजमाई जाएगी। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर मतदान होगा। बेहतर प्रशासनिक तैयारी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लिया गया यह फैसला सियासी दलों की रणनीति को भी नया मोड़ दे रहा है।
महिला आरक्षण और ममता पर तीखा प्रहार
अपनी जनसभाओं के दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने दिल्ली में महिला आरक्षण बिल के गिरने का मुद्दा भी काफी जोर-शोर से उठाया। लोकसभा में संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण बिल खारिज हो गया।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के झालमुड़ी स्वाद ने कैसे बिगाड़ा हेमंत सोरेन का खेला? बंगाल में छिड़ गया नया सियासी संग्राम
सरमा ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी, कांग्रेस और डीएमके को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि इस बिल के गिरने से देश और बंगाल की महिलाएं बहुत दुखी और आहत महसूस कर रही हैं। उनके अनुसार, महिलाएं अब अपने अपमान का बदला लेने के लिए तैयार हैं और वे चुनाव में इन विपक्षी दलों को करारा जवाब देंगी। भाजपा इस भावनात्मक मुद्दे को अपनी जीत का एक बड़ा हथियार बनाने की कोशिश कर रही है।
संसद में बिल गिरने के बाद बढ़ा तनाव
संसद के भीतर हुई लंबी बहस के दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का पुरजोर समर्थन किया था। जब मतदान की बारी आई तो पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिसके चलते यह विधेयक पारित होने से चूक गया। इस झटके के बाद परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका क्योंकि वे सीधे तौर पर महिला आरक्षण से ही जुड़े हुए थे।
अब भाजपा इस विफलता का ठीकरा विपक्ष पर फोड़कर महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। बंगाल का यह सियासी संग्राम अब 4 मई को आने वाले नतीजों की ओर बढ़ रहा है, जब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने सरमा की भविष्यवाणी पर कितनी मुहर लगाई है।
