असम चुनाव: क्या है सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का ‘मिशन बसुंधरा’? जो इस चुनाव में साबित हो सकता है गेमचेंजर
Assam Assembly Election: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर एक जानकारी साझा की। उन्होंने 'मिशन बसुंधरा' के जरिए 23 लाख लोगों को मिली जमीन के बारे में बताया। क्या है 'मिशन बसुंधरा'?
- Written By: सजल रघुवंशी
सीएम सरमा मिशन बसुंधरा (सोर्स- सोशल मीडिया)
CM Sarma Mission Basundhara: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वदेशी लोगों के भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करके और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली अभियान चलाकर ‘जाति, माटी, भेती’ की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि ‘जाति, मति, भेती’ की रक्षा करने के अपने वादे पर खरा उतरते हुए, हमारी सरकार ने न केवल अतिक्रमणकारियों के चंगुल से जमीनें मुक्त कराई हैं बल्कि आजादी के बाद पहली बार स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकार भी दिए हैं।
सीएम ने आगे कहा कि असम की जमीनें यहां के लोगों की हैं, अतिक्रमणकारियों की नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रमुख पहल, मिशन वसुंधरा ने राज्यभर में बड़ी संख्या में परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सीएम सरमा ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
मुख्यमंत्री के अनुसार मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख से अधिक परिवार भूमि मालिक बन गए हैं, जिसे उन्होंने स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। इसके अतिरिक्त लगभग 3.5 लाख चाय बागान परिवारों को ‘टी लाइन’ भूमि के लिए भूमि पट्टे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिससे भूमि स्वामित्व तक पहुंच का और विस्तार हो रहा है।
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Staying true to our promise of protecting ‘Jati,Mati,Bheti’, our Govt has not only freed up lands from the clutches of encroachers but also given indigenous people land rights for the first time since independence. Assam’s lands are for its people, not for ENCROACHERS. pic.twitter.com/Ieh15iI3Ca — Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) March 27, 2026
भाजपा तेजी से उठा रही अतिक्रमण का मुद्दा
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी दोहराया कि सरकार के बेदखली अभियान का उद्देश्य अतिक्रमित भूमि को वापस लेना और पात्र लाभार्थियों विशेष रूप से स्वदेशी लोगों के बीच इसका पुनर्वितरण सुनिश्चित करना है। भाजपा सरकार ने लगातार भूमि अधिकारों और स्वदेशी पहचान के संरक्षण को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है, खासकर चुनावों से पहले। ‘जाति, मति, भेती’ का नारा उसके प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र रहा है, जो पहचान, भूमि और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देता है।
क्या है मिशन बसुंधरा?
दरअसल, मिशन बसुंधरा की शुरुआत 2 अक्टूबर 2021 को हुई थी। यह असम सरकार की भूमि सुधार से जुड़ी एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना और स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकार (पट्टा) प्रदान करना है। इस योजना के जरिए जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा रहा है जिससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अब जमीन का मालिकाना हक बदलना, नाम चढ़वाना जैसे काम ऑनलाइन और ज्यादा पारदर्शी तरीके से हो रहे हैं। इस योजना को तीन चरणों में लॉन्च किया गया।
- मिशन बसुंधरा 1.0: 2 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया।
- मिशन बसुंधरा 2.0: 14 नवंबर 2022 को लॉन्च किया गया।
- मिशन बसुंधरा 3.0: 21 अक्टूबर 2024 को लॉन्च किया गया।
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क्या मिशन बसुंधरा साबित हो सकता है गेमचेंजर?
असम विधानसभा चुनाव 2026 काफी ज्यादा दिलचस्प है। जहां एक तरफ कांग्रेस भाजपा को हराने के मकसद से चुनावी मैदान में है। तो वहीं दूसरी तरफ असम में सरकार को बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता हर वो मुद्दा उठा रही है। जो राज्य की जनता से डायरेक्टली कनेक्ट करने वाले हैं। फिर चाहे वह अपने विकास के कार्यों और अनेकों योजनाओं को हाइलाइट करना हो या फिर घुसपैठियों का मुद्दा हो। ऐसे में ‘मिशन बसुंधरा’ न केवल भूमि अधिकार से जुड़ी योजना है बल्कि इससे जनता के मन में सरमा सरकार के लिए विश्वसनियता और सुरक्षा की भावना पैदा होती है।
