हरियाणा और J-K चुनाव: परिवारवाद की करारी हार, चौटाला को झटका, अब्दुल्ला को छोड़ हर एक को जनता का ‘पटका’
हरियाणाऔर जम्मू-कश्मीर ने परिवारवाद की राजनीति को अब खारीज कर दिया है। विधानसभा चुनावों में हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी (जजपा) को जबरदस्त झटके लगे हैं । जम्मू-कश्मीर में भी सियासी नाम यहां के कुछ उम्मीदवारों के काम नहीं आया।
- Written By: राहुल गोस्वामी
परिवारवाद की करारी हार
नई दिल्ली: आखिरकार हरियाणा और जम्मू-कश्मीर ने परिवारवाद की राजनीति को अब खारीज कर दिया है। इस बार के विधानसभा चुनावों में हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी (जजपा) को जबरदस्त झटके लगे हैं । इन चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पोते भव्य विश्नोई BJP की ताज लहर के चलते आदमपुर से हार गए। वहीं 56 साल बाद इस सीट पर भजनलाल परिवार का कोई सदस्य हारा है।
हालांकि, भजनलाल के बड़े बेटे चंद्र मोहन पंचकूला से कांग्रेस के टिकट पर जरुर जीत गए। वहीं रानियां से अभय चौटाला के बेटे अर्जुन और डबवाली से आदित्य देवीलाल मामूली अंतर से ही जीते। ठीक ऐसा ही चौधरी देवीलाल परिवार के साथ हुआ, इन चुनावों में उनके घर का सभी ‘बांके-लाल” हार गए। इन चुनावों में अभय, दुष्यंत, दिग्विजय, रणजीत चौटाला सभी को करारी हार मिली है। वहीं हरियाणा के तीसरे लाल परीवार बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी व सुरजेवाला परिवार की तीसरी पीढ़ी के आदित्य सुरजेवाला चुनाव जीत गए हैं।
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हरियाणा में परिवारवाद हारा
इस बार पूरे चौटाला परिवार को ही हरियाणा की जनता ने इन चुनावों में नकार दिया है। चाहे वह अभय चौटाला की इनेलो हो या दुष्यंत चौटाला की जेजेपी, दोनों के ही किले इस बार ढहे हैं। केवल इनेलो के अर्जुन चौटाला ही अपनी रानिया सीट को बचा सके हैं।
देखा जाए तो हरियाणा में चौटाला परिवार का राजनीतिक इतिहास बहुत ही जबरदस्त रहा है। इंडियन नेशनल लोकदल हमेशा से ही चौटाला परिवार की पार्टी रही है। हालांकि फिलहाल इस परिवार में फूट पड़ चुकी है। ऐसे में यह पार्टी भी टूटी है।
अब इनेलो की अगुवाई 89 साल के ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अभय चौटाला कर रहे हैं। ता वहीं इनेलो से अलग होकर जननायक जनता पार्टी (JJP) बनी है। इसके प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला और उनके बेटे दुष्यंत चौटाला प्रमुख हैं।
जम्मू-कश्मीर में भी सियासी परिवारों को झटका
वहीं जम्मू-कश्मीर में भी देखें तो सियासी परिवार का नाम यहां के कुछ उम्मीदवारों के काम नहीं आया। घाटी में परिवारवाद का तिलिस्म, टुटता दिखा है। उमर अब्दुल्ला इस बार उपवाद रहे, जो अपनी बडगाम व गांदरबल, दोनों सीटें बड़े अंतर से जीते। इन दोनों सीटों के जीतने से अब्दुल्ला परिवार की राजनीति में पैठ बनी रही। हालांकि इससे पहले हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में उमर को भी तगड़ा झटका लगा था।
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लेकिन वहीं, दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन और महबूबा इल्तिजा मुफ्ती रविंद्र रैना मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती परिवार की पारंपरिक सीट श्रीगुफवारा-बिजबेहरा से दस हजार से ज्यादा वोटों से हारीं ।
यह यहीं तक सीमित नही रहा बल्कि BJP के प्रदेश अध्यक्ष रैना, अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी, पूर्व उप मुख्यमंत्री ताराचंद व मुजफ्फर हुसैन वेग, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रमण भल्ला, विकार रसूल वानी भी इस चुनाव हार गए। जानकारी दें कि जम्मू कश्मीर में यह चुनाव 10 साल के बाद हुआ है। दरअसल कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म हो जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव हुआ था।
