केरलम में कांग्रेस की सुनामी: 7 साल बाद फिर बना 4 मुख्यमंत्रियों वाला रिकॉर्ड, जानें जीत के 5 बड़े कारण
Congress Victory Keralam: केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नीत यूडीएफ की बड़ी जीत ने 10 साल का सूखा खत्म कर दिया है। इस जीत के साथ ही देश में कांग्रेस शासित राज्यों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
केरलम में कांग्रेस की जीत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Congress Victory Keralam Reasons: केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने देश की राजनीति में कांग्रेस के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। 140 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में कांग्रेस गठबंधन (UDF) अभी तक के परिणाम में लगभग 90 सीटों पर बढ़त बनाकर बड़ी जीत की ओर बढ़ रहा है। इस जीत के साथ ही केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री शपथ लेगा। यह जीत न केवल राज्य के लिए बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा रिकॉर्ड लेकर आई है।
7 साल बाद टूटा ‘3 का फेर’
कांग्रेस पिछले काफी समय से ‘3 के फेर’ में फंसी हुई थी यानी देश में एक साथ उसके पास 3 से ज्यादा मुख्यमंत्री नहीं रहे हैं। 2019 में आखिरी बार पार्टी के पास 4 मुख्यमंत्री थे लेकिन उसके बाद राज्यों की संख्या घटती-बढ़ती रही। अब 2026 में हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के बाद केरलम में भी कांग्रेस की सरकार बन जान से 7 साल बाद पहली बार देश में कांग्रेस के 4 मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब की जीत के समय यह आंकड़ा 4 तक पहुंचा था।
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कांग्रेस की जीत के 5 मुख्य मंत्र
राजनीति के जानकारों के अनुसार, केरलम में इस बड़ी जीत के पीछे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति के ये 5 प्रमुख कारण रहे हैं:
गठबंधन की मजबूती: यूडीएफ ने स्थानीय स्तर पर 3 छोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़कर वोटों के बिखराव को रोका।
नए चेहरों पर दांव: लोकसभा के हारे हुए प्रत्याशियों और कई नए युवाओं को मैदान में उतारा गया और डोर-टू-डोर कैंपेन को बढ़ावा दिया गया। जिससे राह और आसान हो गई।
वोट बैंक का ध्रुवीकरण: कांग्रेस ने सीपीएम सरकार के दौरान बढ़ते बीजेपी के प्रभाव को मुद्दा बनाया। जिसके बाद मुस्लिम और ईसाई मतदाता कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो गए।
गुटबाजी पर लगाम: चुनाव के समय केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथल्ला और वीडी सतीशन जैसे दिग्गज नेताओं के बीच के मतभेदों को शांत रखा गया और वे एकजुट होकर प्रचार में उतरे।
युवाओं और अल्पसंख्यकों पर फोकस: कांग्रेस ने सचिन पायलट, इमरान प्रतापगढ़ी और जेबी माथेर थॉमस जैसे युवा नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा। इन नेताओं ने अपनी रैलियों के जरिए युवाओं और पढ़े-लिखे वोटरों को पार्टी से जोड़ा और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार पर जमकर निशाना साधा।
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केरलम का कांग्रेस में बढ़ा कद
केरलम कांग्रेस के लिए बहुत खास है क्योंकि प्रियंका गांधी यहीं से सांसद हैं। साथ ही, पार्टी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक, के.सी. वेणुगोपाल भी केरलम के ही रहने वाले हैं। इस बड़ी जीत से न केवल पार्टी का जोश बढ़ा दिया है बल्कि राज्य में कांग्रेस का संगठन भी काफी मजबूत हो गया है।
